मजदूर रिफॉर्म नहीं जानता उसे नहीं पता आत्मनिर्भरता का मतलब फॉर्मल/इन फॉर्मल सेक्टर उसे नहीं पता जीडीपी और ग्रोथ इकानॉमी और सेंसेक्स उसे कुछ नहीं पता बड़ी बड़ी बातों के बीच इस बड़ी त्रासदी के बीच उसे केवल यही पता… Read More
मजदूर रिफॉर्म नहीं जानता उसे नहीं पता आत्मनिर्भरता का मतलब फॉर्मल/इन फॉर्मल सेक्टर उसे नहीं पता जीडीपी और ग्रोथ इकानॉमी और सेंसेक्स उसे कुछ नहीं पता बड़ी बड़ी बातों के बीच इस बड़ी त्रासदी के बीच उसे केवल यही पता… Read More
आभार प्रकट करते हैं हम उस महामानव को जिसने हमारे प्रज्ञा चक्षु खोले कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन का वह पुत्र सर्वसंग परित्यागी गौतम नाम धारी महाकारूणिक था, जिसने जीने का सही ढंग मानव समाज को सिखाया । हम चलेंगे उस… Read More
हम देखते हैं, सूखे हुए पेड़ों को जर्जरित पौधों को कठिन काल की हर दौर में एक पीड़ा है उनकी जिंदगी ये चीखते नहीं, चिल्लाते नहीं है व्यथा का मुंह कभी खोलते ही नहीं कुछ मांगते नहीं गिड़गिड़ाते दिखते नहीं… Read More
आज पूरा देश कोरोना के आतंक से परेशान है कोई कहता शैतान तो कोई कहता हैवान है चार बार नहाते है दिन में, सौबार चमकाते हाथ हैं शान से कहती है मेरी बीवी, देखो घर में कितना काम है सारे… Read More
पलायन, महज घर छोड़ कर जाना ही नहीं होता पलायन सपनों का बिखर जाना और हृदय का भर जाना होता है गहरे घावों से सर पर पोटली लिए गोद में बच्चे लिए बुजुर्गों को पीठ पर लादे दहकती गर्म कंक्रीट… Read More
तू ही तपस्या है तू ही धर्म है त्याग है तू तू ही हकीकत है तू ही इबादत है खुदा का प्यारा ख्वाब है तू माँ शब्द ये छोटा पर रिश्ता सबसे बड़ा होता है जब हम कोख में पलते… Read More
माँ इन चंद पन्नों में तुझे लिख नही सकता । माँ का सिर्फ एक दिन हो ऐसा कह नही सकता । माँ.. माँ हर पल है हर सांस है हर दिन, हर महीना हर साल है माँ.. माँ नदिया है… Read More
आदमी मिट्टी का पुतला है और जो चीज मिट्टी से बनती है वह मिट्टी में ही मिल जाती है किंतु इस तरह से मिल जाना मिट्टी में कि कोई कंधा देने वाला भी न हो कुछ हजम नहीं होता। संक्रमण… Read More
सभ्यताओं का भी अपना ही हिसाब होता है अपना ही ढंग होता है अपने ही ढंग से बनती हैं सभ्यताएं अपने ही ढंग से ढहती हैं सभ्यताएं। ढहने के साथ ही कुछ सभ्यताएं अपने पीछे छोड़ जाती हैं ऐसे चिन्ह… Read More
खुले आसमान के नीचे जब भी मैं चाँद को निहारती हूँ । मन ही मन बस यही सोचती और विचारती हूँ ॥ इतनी शीतल इतनी निश्छल कोई कैसे हो सकती है । माँ वो है जिसके आशीष से मेरी जीवन… Read More