मत बेटी नै समझो पराई। हो बेटी खरा धन भाई।। 1. बेटां पै पड़ै बेटी भारी, बेटी हो घणी आज्ञाकारी, ना ल्यावै कदे बुराई। हो बेटी खरा धन भाई।। 2. दया, त्याग की मूर्ति बेटी, सेवा के म्हां फिरती बेटी,… Read More
मत बेटी नै समझो पराई। हो बेटी खरा धन भाई।। 1. बेटां पै पड़ै बेटी भारी, बेटी हो घणी आज्ञाकारी, ना ल्यावै कदे बुराई। हो बेटी खरा धन भाई।। 2. दया, त्याग की मूर्ति बेटी, सेवा के म्हां फिरती बेटी,… Read More
धन की वर्षा हुई बाजारों में , चेहरों पर खुशियों की लड़ियाँ जगमगाई। धन से धन्य दिन-रात हुए जगमग, धन तेरस ने शुरुआत करवाई । कुबेर ने घर आंगन खोला खजाना , धन-धान्य खुशियों की घर-घर लहराई । धन की… Read More
मेहनत वह अनमोल कुंजी है, जो भाग्य के बंद कपाट खोल देती है। यह राजा को रंक और दुर्बल मनुष्य को सबल बना देती है। यदि यह कहा जाए कि श्रम ही जीवन है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। गीता… Read More
1. किसान है क्रोध ••••••••••••••••• निंदा की नज़र तेज है इच्छा के विरुद्ध भिनभिना रही हैं बाज़ार की मक्खियाँ अभिमान की आवाज़ है एक दिन स्पर्द्धा के साथ चरित्र चखती है इमली और इमरती का स्वाद द्वेष के दुकान पर… Read More
छठ तिथि शुक्ल पक्ष कार्तिक में, मनाया जाता ये अनुपम छठपर्व। सूर्यदेव की उपासना का पर्व यह, सौर मंडल के सूर्यदेव का है पर्व।। सूर्योपासना है सर्वश्रेष्ठ पर्व की, सूर्योपासना की थी अत्रि पत्नी ने। और श्रेष्ठतम इस व्रत को… Read More
कई महीनों से बल्कि साल के बराबर वैसे देखा जाए तो हमेशा से.. रैक में पड़ी किताबे जद्दोजहद करने के बाद भी, सड़को पर निकलकर सांस्कृतिक सामाजिक राजकीय विद्रोह कर पाने में नाकामयाब रही हैं। शायद, यह पूरी तरह सच… Read More
सब से पहले तो में अपने देशवासियों को दीपावली की बधाई देता हूँ। इस बार की दीपावली आप सभी को नई रोशनी लेकर आये और आपका जीवन खुशियों से भर जाए साथ ही एक निवेदन भी करना चाहूँगा की आप… Read More
ये मेरे भीतर छिपी व्याकुलता ही है, जिसने मेरे स्वभाव में अधीरता को जन्म दिया है। माना मेरी बुद्धि संकीर्ण थी और बुद्धजीवियों के व्यापक परंतु, इस संकीर्ण ने ही ढांढस बंधा स्वयं को संभाला, विपरीत व्यथाओं मेँ हर-पल। प्रतिकार,… Read More
जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका जमानेके इशारे से जो अपना हर कदम बढ़ाओगे मानो बात या न मानो मगर तुम फिसल जाओगे जमाना कब रहा किसका जमाना रहेगा किसका तुम्हारी रफ्तार से पीछे रहता है तो ये खीझता… Read More
जब भी आवाज दूं चले आना , मेरे गिरधर , मेरे कन्हाई जी । रीत प्रीत की भूल न जाना , जो भक्त-भगवान बनाई जी । तन-मन प्यासा जन्म-जन्म से, दरस को तरसे ये अखियां। बोल बोल-के छेड़े है जग… Read More