पुस्तक समीक्षा : गर्दिशों के गणतंत्र में

‘गर्दिशों के गणतंत्र में’ काव्य संग्रह में मानवीय चेतना के विविध प्रसंग- हिंदी साहित्य में काव्य की प्राचीन परंपरा रही है। आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल आदि में साहित्य काव्यात्मक रूप से लिखा गया। रीतिकाल के बाद रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध… Read More

कविता : बदलता रिश्ता

आया है ये वक्त कैसा रक्त नहीं रक्त जैसा। बेटा आज बाप को ही अर्थ समझाता है। चपर-चपर बोले सुनता ना हौले-हौले। जननी के सामने ना सर को झुकाता है। मौके की फ़िराक़ में है सपनों की साख में है।… Read More

व्यंग्य : कोटि-कोटि के कवि

“कोई ऐ शाद पूछे या न पूछे, इससे क्या मतलब, खुद अपनी कद्र करनी चाहिये साहब कमालों को”। किसी गुमनाम शायर की इन मशहूर पंक्तियों को हमारे हिंदी-उर्दू के कवियों और शायरों ने अपने दिल पे ले लिया है शायद।… Read More

कविता : मेरे जीवन आधार

मेरे जीवन आधार सदा, केशव माधव वृषभानु दुलारी मोपे कृपा करो मेरे कष्ट हरो मेरे नटवर की प्राणन प्यारी जमुनातट हो वंशी वट हो, नैनन आगे मेरो नटखट हो चितचोर चपल चंचल मन में, रख लूँ तुम्हें मेरे रास बिहारी… Read More

शिक्षक सम्मान से सम्मानित हुए प्रो. उपेंद्र कुमार

शिक्षक संघ, उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी के तत्त्वावधान में आज आगामी 30 जून 2025 को अवकाश ग्रहण करने जा रहे सांख्यिकी विभाग के प्रो. उपेंद्र कुमार का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के पूर्व… Read More

babu bhaiya

मूवी गपशप : तो क्या सच में दर्शकों के साथ हो गई हेरा फेरी!

क्या बाबू भैया के बिना हेरा फेरी मूवी के बारे में कोई सोच सकता है? पूरी फिल्म को बाबू भैया ही बाहुबली बनकर अपने कंधे पर लेकर आगे चलते हैं। जिसमें उनकी दोनों मजबूत भुजाएँ राजू और श्याम हैं। मगर… Read More

babu bhaiya

तो क्या सच में दर्शकों के साथ हो गई हेरा फेरी!

क्या बाबू भैया के बिना हेरा फेरी मूवी के बारे में कोई सोच सकता है? पूरी फिल्म को बाबू भैया ही बाहुबली बनकर अपने कंधे पर लेकर आगे चलते हैं। जिसमें उनकी दोनों मजबूत भुजाएँ राजू और श्याम हैं। मगर… Read More

कविता : स्वच्छता अभियान

आओ सब मिल एक बने हम, स्वच्छता की ओर बढ़ें हम। भारत मां की यही पुकार, स्वच्छ बने ये घर–संसार। आओ बढ़ाएं कदम पुरज़ोर, बढ़े कदम स्वच्छता की ओर। घर से निकलो सब लोग अभी, यह पुण्य कार्य पूर्ण होंगे… Read More

operation sindoor

कविता : ऑपरेशन सिंदूर

शेर-शेरनियाँ घूम रहे थे पहलगाम की वादी में, चूहों ने था घात लगाया, कायरता की आदी में। चूहा अपने बिल से निकला कुछ चूहों को साथ लिए, वादी को आतंकित कर दी बंदूकों को हाथ लिए। बोला अपना धर्म बताओ… Read More