हंसते चीखते गली मोहल्ले, अब वीरान से हो गए है। शहर के सारे चौहराये, अब सुनसान हो गए है। पर घर परिवार के लोग, घरों में कैद हो गए है। और परिवार तक ही, अब सीमित हो गए है। और… Read More
हंसते चीखते गली मोहल्ले, अब वीरान से हो गए है। शहर के सारे चौहराये, अब सुनसान हो गए है। पर घर परिवार के लोग, घरों में कैद हो गए है। और परिवार तक ही, अब सीमित हो गए है। और… Read More
ना जीने को दिल करता है, ना हीं मर जाने को, दिल करता है मेरा, सुन्दर – सा नगर बसाने को । जहाँ ना हो चोरी ड़कैती, ना हीं हो मर महँगाई की; जहाँ पाप समझे सब खाना, कमाई हराम… Read More
हिज्र में उसका मेरे ही सामने ख़त को यूं फाड़ देना कि तु भी जाकर के मेरे सारे ख़त-वत को यूं फाड़ देना आज भी उसके बदन की खुशबू आती है उसके ख़त से, कि नही होता हैं आसां अपनी… Read More
बनाकर आशियाना अपनी मोहब्बत का, क्यों तुम गिरा रहे हो। जमाने के डर से शायद, तुम भाग रहे हो। और लोगो के भंवर जाल में, तुम फँस गये हो। और अपनी मोहब्बत का, जनाजा खुद निकल रहे हो।। ये दुनियाँ… Read More
मैं किसान हूँ अब आपने अनुमान लगा ही लिया होगा कि मेरे पिता एवं पितामह भी अवश्य ही किसान रहे होंगे आपका अनुमान सही है श्रीमान मेरे पूर्वज भी थे किसान किसान का पुत्र किसान हो या ना हो किसान… Read More
कहते हैं जिस स्थान पर आपका जन्म और जिस परिवेश में आपका पालन-पोषण होता है वह आपके व्यक्तित्व में दिखता है। प्रयागराज के पावन पुनीत भूमि पर जन्मे अभिनेता दीपराज राणा अपने अभिनय के लिए तो जाने ही जाते हैं… Read More
निशानी देने वाले अपनी कहानी भूल गए कहानी तो छोड़िए आंख का पानी भूल गए आप ही क़ैद किये थे दिल को तह खाने में, और आप ही नज़रों की निगरानी भूल गए बस उन्हें यक़ीन नहीं कि वो क़यामत… Read More
मधुर मिलन का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नवेली दुल्हन को, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबो में डूबी रहती है, दिन रात सताती याद उन्हें। होती रिमझिम… Read More
पिपासा तृप्त करने प्यासी धरा की बादल प्रेम सुधा बरसाने आया है अब तुम भी आ जाओ मेरे जीवन प्रेमाग्नि जलाने सावन आया है देखकर भू की मनोहर हरियाली नभ के हिय में प्रेम उमड़ आया है रिमझिम फुहारें पड़ीं… Read More