मैं खुद को ही खोज रहा। अपने खुद के अंदर। पर वो नहीं मिल रहा। मुझको खुद के अंदर।। कैसे मैं खोजू खुदको। कोई बताओ मुझको। क्या मेरा अस्तित्व है। मेरे खुद के अंदर।। अब चिंता में डूब रहा। मेरा… Read More
मैं खुद को ही खोज रहा। अपने खुद के अंदर। पर वो नहीं मिल रहा। मुझको खुद के अंदर।। कैसे मैं खोजू खुदको। कोई बताओ मुझको। क्या मेरा अस्तित्व है। मेरे खुद के अंदर।। अब चिंता में डूब रहा। मेरा… Read More
काश सभी पेड़ साल, महुआ होता पिपल, बरगद और तुलसी होता पेड़ कभी न काटा जाता हर वक्त पेड़ को पूजा जाता।। चंदन का है नाम और दाम इनसे शुभ हर घर में काम बेल और आम का महत्व है… Read More
आऊंगा मैं तुझसे मिलने ,माँ मेरी ए , खाकर कसम तेरी कहता हूं । देश-तिरंगे का मान बढ़ाने को , तुझसे दूर मैं रहता हूँ । आऊंगा मैं तुझसे मिलने…… चिट्ठी तेरी मुझको आई है जो माँ , मेरा ही… Read More
सफर में आनंद आता है जब मिले है अच्छे लोग। तो मस्ती से कट जाता अपनी यात्रा का दौर। बात ही बातों का जहाँ चलता रहता है दौर। कोई जोक सुनाता है तो कोई गीत गाता है।। सभी के आनंद… Read More
नहीं करता जो विश्वास माता रानी के ऊपर। नरक रहता है उसका ये देखो मानव जीवन। इसलिए कहता हूँ मैं रखो विश्वास तुम उन पर। तुम्हारा ये मानव जीवन खुशी से बीत जायेगा।। सुने होंगे बहुत तुमने माता रानी के… Read More
तुम अगले जन्म में मिलना तब शायद पांव में न बंधी होगी रूढ़ियों की जंजीर, परम्पराओं के बोझ तले न सिसके तब यूँ मेरी पीर, तब आदर्श नारी बनने की अपेक्षाओं से पहले समझी जाऊंगी शायद एक सुकुमार सी लड़की,… Read More
किसी किताबख़ाने में जाओगे आप कभी, तो हर क़िताब को अच्छे से झांककर देख लेना, हा, सिर्फ मेरी ही नही होगी हर किताब मौजूद किताबो में, पर बिल्कुल किसीने मेरी तरह मोड़ के रखे होंगे किताबो के पन्ने, जैसे कोई… Read More
धरती से उड़कर आदित्य, उस आदित्य ओर चला। बदल-बदल कर वह कक्षाएँ, एक बार फिर वो सम्भला। इसरो की आशाएँ उस पर। भारत-विश्व स्वाभिमान है। *अजस्र* भास्कर देख नजारा, विस्मय स्वर उससे निकला। कदम-कदम आगे ही बढ़ता, ‘आदित्य’, ‘आदित्य’ का… Read More
हर एक अंत से ही नई शुरुआत होती है। भूलाकर गिले शिकवो को नई शुरुआत करते हैं। लोग तो आते हैं जाते हैं… पर उनके काम याद आते है। शायद इसकी को दुनियांदारी दुनियां वाले कहते है।। दिल व्याकुल हो… Read More
गली-गली में घूमते… शराफ़त का मुखौटा लगाए कभी सहायक बनकर कभी खास बनकर। उठाते मजबूरी का फायदा नौकरी, धन और प्रेम का झांसा देकर। नजरों में कच्चा खा जाने की प्यास मन में हवस का अरमान लिए करते हैं रतिभरा… Read More