mosam flower

लेख : शरद ऋतु

श्वेत चंद्रमा रजत रश्मियां, रूप यौवन से अपनी छटा बिखेर रहा।। ओस की बूंदें बरस रही रूप यौवन से लदे, खिल रहे खेत सारे।। सुंदर रूप हुआ धरा का फूलो की खुशबू से महका आंचल वसुंधरा का।। सतरंगी पुष्प –… Read More

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कविता : मर्यादा की मूरत राम

माँ कौशल्या की कोख से नृप दशरथ सुत जन्में राम। नवमी तिथि चैत्र मास को अयोध्या का था रनिवास।। निहाल हुए अयोध्यावासी, बजने लगी चहुंओर बधाई। जन जन के अहोभाग्य हो, मानुज तन ले प्रगटे रघुराई।। माता पिता की करते… Read More

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नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया द्वारा मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन

आज नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया के तुलसी सभागार में मासिक नागरी काव्य गोष्ठी सभाध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। जिसके मुख्य अतिथि काशी से पधारे सुप्रसिद्ध कवि गज़लकार और समीक्षक डॉ. चंद्र भाल सुकुमार और विशिष्ट अतिथि… Read More

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कविता : निर्वाण की ओर

जन्मी उर में जिज्ञासाएँ, देखा जब निस्सार जगत; पीड़ा मानव मन की देखी, शूल हृदय में था चुभा। “उर्वरा थी भूमि मन की, बीज जा उसमें गिरा।।” उठी हूक अंतःस्थल में, ये कहां हम आ गए? छोड़ सारे वैभवों को,… Read More

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कविता : डॉ. राजेंद्र प्रसाद

जीरादेई सीवान बिहार में तीन दिसंबर अठारह सौ चौरासी में, जन्मा था एक लाल। दुनिया में चमका नाम उसका, थे वो बाबू राजेंद्र प्रसाद।। तीन बार कांग्रेस अध्यक्ष बन, संविधान सभा के अध्यक्ष रहे। राष्ट्रपति बन राजेंद्र बाबू जी, जन… Read More

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कविता : नया कश्मीर

लाल चौक पर फ़हरे तिरंगा मन में ये एक आशा है,कश्मीर बने स्वर्ग सुन्दर-सा दिल की ये अभिलाषा है।                  बहुत हुआ खून-खराबा                   रक्तरन्जित धरा ये कहे,                  सपूतो के तन में मेरे अब                   लहू प्रेम का बस बहे।  धारा-धारा कर तुमने  द्वेष की… Read More

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कविता : अन्नदाता किसान

अन्नदाता होकर भी ख़ुद पानी पीकर अपना भूख मिटाएँ पर जग को भूखा न सोने दे ऐसे अन्नदाता किसान हमारे… चाहे आँधी आये या तूफ़ान चिमिलाती धूप हो या कड़ाके की ठण्ड मेहनत करने से यह नहीं घबराते बच्चे समान… Read More

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भजन : आशीर्वाद से

तेरा आशीष पाकर, सब कुछ पा लिया हैं। तेरे चरणों में हमने, सर को झुका दिया हैं। तेरा आशीष पाकर …….। आवागमन गालियां न हत रुला रहे हैं। जीवन मरण का झूला हमको झूला रहे हैं। आज्ञानता निंद्रा हमको सुला… Read More

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कविता : प्रकृति

1. ऐ प्रकृति ऐ प्रकृति हमसे कुछ कहती है। तुम्हारे सारे शिकवें हमें सवीकार है।। ऐ प्रकृति तेरी हवाएं हमें सुकून देती है। तेरी बेचैनी को हम बखूबी समझते हैं।। ऐ प्रकृति तू हमसे इतना नाराज़ क्यों है? माना हमसे… Read More

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गीत : किसान

किसान क्या होते हैं तुम गांव वालो से पूछो। ये वो शख्स होते हैं जो खाने देते सबको अन्न। किसान क्या होते हैं तुम गांव वालो से पूछो।। परन्तु इसकी झोली में नहीं मिलता उसका हक, यहीं से गरीबी का… Read More