मुल्ला नसरुद्दीन एक शाम अपने घर से निकला | उसने सोचा कि चलो आज अपने दो-चार मित्रों के घर चला जाय और उनसे भेंट-मुलाकात की जाय | वह अभी घर से निकलकर कुछ ही कदम चला था कि दूसरे गाँव से उसका एक दोस्त… Read More
मुल्ला नसरुद्दीन एक शाम अपने घर से निकला | उसने सोचा कि चलो आज अपने दो-चार मित्रों के घर चला जाय और उनसे भेंट-मुलाकात की जाय | वह अभी घर से निकलकर कुछ ही कदम चला था कि दूसरे गाँव से उसका एक दोस्त… Read More
आजकल देश में मोटा भाई कहने का चलन बहुत बढ़ गया है। माना जाता है कि बंधुत्व और दोस्ती का ये रिश्ता लोहे की मानिंद सॉलिड है। पहले ये शब्द भैया कहा जाता था ,लेकिन जब से अमर सिंह ने… Read More
हबीब तनवीर का जन्म 1 सितम्बर, 1923 को बैजनाथ पारा, रायपुर में हुआ था। बचपन से ही उनका रुझान कला एवं अभिनय की तरफ रहा। अपने बम्बई प्रवास के दौरान तनवीर आकाशवाणी (बम्बई) के तत्कालीन निर्देशक रहे तथा ‘फिल्म इंडिया’… Read More
आज तीज है …माँ का बिछुआ बदलना बहन का मेंहदी रचाना भाभी का चमकता शृंगारआज तीज है…बाबूजी का नयी साड़ी सिरहाने छिपानाजीजा का वो रसगुल्ले पहले से लेकर आनाभाई का पैकेट बंद उपहार दिखा ललचाना आज तीज है…नयी चूड़ियों में चमकती कलाई ऐड़ियों का… Read More
मेरी प्रिय अमृता आप जहाँ कहीं भी हैं , ये आपके लिये … वो जो ऐश ट्रे में बुझी हुई सिगरेट के साथ रह गयी थी ललछौंह सी नन्ही सी चिंगारी रंग -बिरंगे रंगों से रंगी कूँची में ,छूटगया था जो धोने के… Read More
क्या यह संभव है कि एक कालखंड में या अलग अलग कालखंड में दो या तीन कवि महान हो सकते हैं? क्या एक कवि को दूसरे कवि के निकष पर कसना और फिर उनका मूल्यांकन करना उचित है ? एक कवि के पदों… Read More
जातिवादी विमर्श की शुरुआत आदिकाल से ही है, भक्तिकाल में इस पर जमकर प्रहार हुआ,रीतिकाल में जातिवादी विमर्श पर कुछ भी नहीं दिखलाई पड़ता है। आधुनिक काल तथा स्वतंत्रता आंदोलन के समय यह जातिवादी विमर्श, अंग्रेजों के लिए एक बहुत… Read More
कुछ लेखक होते हैं जो बहुत कुछ लिख जाने के बाद भी अपना पता नहीं दे पाते तो कुछ लेखक ऐसे भी होते हैं जिन की रचनाएं तुरंत उन का पता दे देती हैं। पर किसी लेखक की रचना ही… Read More
तुझपे ग़ज़ल लिखूं या कोई किताब लिख दूँ…दिल करता है तुझे महकता हुआ ग़ुलाब लिख दूँ…।तेरे हुस्न की जहाँ में कोई मिसाल नहीं है…तुझे आसमां पे चमकता हुआ माहताब लिख दूँ…।तेरी खूबसूरती वो दहकता हुआ शोला है….कभी कभी लगता है… Read More
आ अब लौट चलें(https://www.youtube.com/watch?v=Rh4iH0ZR6CE) कोई गीत ‘आह् वान’ का स्वर लिए, किस प्रकार प्रभावी रूप से मारक क्षमता की उच्च तीव्रता को समेटे, सामूहिक उद् बोधन का ‘नाद’ बन कर, कालजयी नेतृत्व की बागडोर थामें, ‘युग प्रवर्तक’ बन जाता है, ‘आ… Read More