“मैं” से उठकर मैंने जब देखा जो ज़रा ध्यान से आत्मा थी दिग्भ्रमित, मन था भरा अज्ञान से। चक्षुओं की परिधि भी सीमित रही स्वकुटुंब तक संकुचित समस्त भावनाएँ, थी पहुँच प्रतिबिम्ब तक ओज़ वाणी में था इतना, स्वयं सुन… Read More
“मैं” से उठकर मैंने जब देखा जो ज़रा ध्यान से आत्मा थी दिग्भ्रमित, मन था भरा अज्ञान से। चक्षुओं की परिधि भी सीमित रही स्वकुटुंब तक संकुचित समस्त भावनाएँ, थी पहुँच प्रतिबिम्ब तक ओज़ वाणी में था इतना, स्वयं सुन… Read More
माता विमला दो मुझे, बुद्धि विनय बल ज्ञान। अमर कलम मेरी रहे, दो मुझको वरदान।। सरस्वती माँ से करूँ, इतनी सी फरियाद। मेरे गीतों से करें, लोग मुझे बस याद।। ज्ञानदा माँ दे मेरे, शब्दों में वो धार। सच को… Read More
ये जिस्म, ये लिबास, यहीं छोड़ जाऊंगा जो कुछ है मेरे पास, यहीं छोड़ जाऊंगा जब जाऊंगा तो कोई न जायेगा मेरे साथ सब लोगों को उदास, यहीं छोड़ जाऊंगा भर-भर के जाम जिस में पिए उम्र भर वही ख़ुशियों… Read More
काश! हम सब जन्मजात अंधे होते हमारी आँखों में कतई रौशनी न होती चेहरे पर लगा एक काला चश्मा होता और हाथ में लकड़ी की एक छड़ी होती तब इस विश्व का स्वरुप ही दूसरा होता प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व… Read More
श्रद्धेय गुरुवर व हिंदी के अनथक योद्धा धनंजय जी को अंतिम प्रणाम!!! श्रद्धेय गुरुवर प्रोफेसर धनंजय वर्मा की चिर विदाई ने साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। उनका जाना, एक युग का समाप्त हो जाना है।उनकी जिंदादिली मशहूर थी।… Read More
मिली मुश्किलों से आज़ादी, मगर न इस की कद्र हमें। पड़ आदत आराम की गई, नहीं देश की फिक्र हमें॥ देश की चिंता न हम करते, हम भूलें ज़िम्मेदारी। भोर करेगा कौन यहाँ अब, निंद्रा सबको है प्यारी॥ मरने मिटने… Read More
मैं आज़ाद भारत हूँ, अमन पैगाम है मेरा इतिहास देख ले तू दया धर्म नाम है मेरा मेरी सरलता को तू कमज़ोरी न समझना रावण! याद रख बच्चा-बच्चा राम है मेरा। मेरे गुरुर से ही ज़िंदा है तेरा गुरूर ईमान… Read More
भारत में बसे मेरे प्राण। तिरंगा है मेरी पहचान।। बोल दो जय हिंद सारे जन गण मन मिल कर सब गाएं। इसे जहाँ का भजन बनाएं।। सारे दिलों में ये अरमान। जगत में बढ़े देश का मान।। बोल दो जय… Read More
सैनिक जोशीले साहसी शूर रिपु मद करे चूर, देश पे कुर्बान योद्धा करते जवानी है। अपना लुटाएं सब देश को बताएं रब, भारत में जन्में ऐसे वीर स्वाभिमानी है। देश से मोहब्बत ये मरके निभाते हैं, बाँकुरो का देश प्रेम… Read More
हम एक हैं ये आईये दुनिया को दिखाइये घर-घर में ग़ुरूरो-शान से तिरंगा फहराइये। पुरज़ोर आवाज़ में अदब से राष्ट्रगान गाईये जय हो भारत माता की जयकारा लगाइये। अमृतोत्सव आज़ादी का है मन से मनाईये वीरों की वीरगाथाएँ ज़रा भईया… Read More