साइनबोर्ड पेंटर से टॉप सांग राइटर तक राहत इंदौरी कोई व्यक्ति अपनी मेहनत, प्रतिभा और हौसले से अपनी हैसियत कैसे बदल सकता है उसका एक बेहतरीन उदाहरण गीतकार डॉ. राहत इंदौरी हैं। वे एक साइनबोर्ड पेंटर से कॉलेज के अध्यापक… Read More
साइनबोर्ड पेंटर से टॉप सांग राइटर तक राहत इंदौरी कोई व्यक्ति अपनी मेहनत, प्रतिभा और हौसले से अपनी हैसियत कैसे बदल सकता है उसका एक बेहतरीन उदाहरण गीतकार डॉ. राहत इंदौरी हैं। वे एक साइनबोर्ड पेंटर से कॉलेज के अध्यापक… Read More
रूप बड़ा प्यारा है, चेहरा बड़ा निराला है बड़ी से बड़ी मुसीबत को कन्हैया जी ने पल भर में हल कर डाला है!! मुरली मनोहर ब्रिज के धरोहर वह नंदलाल गोपाला है, बंसी की धुन पर सब दुख हरनेवाला मुरली… Read More
लगे हैं वनों की रक्षा में जो जमीन उनकी छीनी जा रही है। वनवासी वो जगसेवक हैं वो नींद उनकी छीनी जा रही है।। वो भी तो लगे हैं नित पर्यावरण की सुरक्षा संरक्षा में ही, प्राणवायु को को बचाने… Read More
पुस्तक : अथर्वा मैं वही वन हूँ लेखक : आनंद कुमार सिंह प्रकाशक : नयी किताब प्रकाशन, दिल्ली समीक्षक : विनोद शाही मानव जाति का भविष्य कविता में है “अपरा विज्ञानों के महाविकास के फलस्वरूप यहाँ पर गद्यदेश का विकास… Read More
पुस्तक – आतंकवाद पर बातचीत सम्पादक द्वय – डॉ० पुनीत बिसारिया , रोनी ईनोफाइल प्रकाशक – यश पब्लिकेशंस, दिल्ली ISBN नंबर – 978-93-85689-80-2 प्रथम संस्करण – 2018 मूल्य – 695/- समीक्षक – तेजस पूनिया हाल ही में एक फिल्म रिलीज… Read More
देखो रामलला आये हैं, साथ में खुशियाँ लाये हैं।। 500 साल बाद अयोध्या में, सबके दुःख हरने आये हैं।। हे प्रभु करदो कृपा इतनी, दुःख,दर्द हर लो जल्दी।। केरोना भयंकर बीमारी को, कर दो इस देश से छुट्टी।। मेरे जीवन… Read More
हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट और क्लासिक फिल्मों में शुमार मुगल ए आजम का मशहूर गीत जब प्यार किया तो डरना क्या जिस शायर ने लिखा है वो जनाब शकील बदायूँनी थे। शकील ऐसे शब्द चुनते थे सीधे दिल… Read More
हर सावन में आती राखी। बहिना से मिलवाती राखी। बहिन-भाई का अनोखा रिश्ता। बना रहे ये बंधन हमेशा।। जो भूले से भी ना भूले। बचपन की वो सब यादे। बहिन-भाई का अटूट प्रेम। सब कुछ याद दिलाती राखी।। भाई बहिन… Read More
“खता मत गिन दोस्ती में, कि किसने क्या गुनाह किया.. दोस्ती तो एक नशा है, जो तूने भी किया और मैंने भी किया।” “दोस्ती सिर्फ पास होने का नाम नही, अगर तुम दूर रहकर भी हमें याद करो… इससे बड़ा… Read More
क्यों न फिरदौस को दोज़ख़ से मिला दें या रब, सैर के वास्ते थोड़ी-सी फ़िज़ा और सही।। ग़ालिब मुंशी प्रेमचंद या ऐसे अनेक रचनाकारों को आज आधुनिकतावाद के इस महामारी की चपेट में बैठे-बिठाए कोरोना पॉज़िटिव घोषित किया जा रहा… Read More