हिंदी मेरी माँ है तो उर्दू है मेरी खाला। दोनों ने ही मिलकर मुझे बचपन से है पाला। दोनों की रहनुमा ने लेखक कवि बना डाला। कैसे मैं भूल जाँऊ अपनी दोनों मांओ को। जो कुछ भी मैं बना हूँ… Read More
हिंदी मेरी माँ है तो उर्दू है मेरी खाला। दोनों ने ही मिलकर मुझे बचपन से है पाला। दोनों की रहनुमा ने लेखक कवि बना डाला। कैसे मैं भूल जाँऊ अपनी दोनों मांओ को। जो कुछ भी मैं बना हूँ… Read More
अगर लिखती कविता मैं, तो लिखती ख़ुद पर स्वयं की प्रशस्ति में, ख़ुद को समर्पित । अगर गाती गीत मैं, गुनगुनाती स्वयं को स्वयं के आह्लाद को या स्वयं की पीड़ा को । अगर उड़ती मैं, तो उड़ती अपने आकाश… Read More
रुख हवाओं का ऐसे बदलने लगा सोना शीशे के साँचे में ढलने लगा लोग करने लगे कत्ल लग कर गले स्वार्थ रिश्तों को जमकर निगलने लगा देखकर उनकी रोटी परेशान हूँ दाल गलने लगी, मुल्क जलने लगा अब अँधेरे के… Read More
तेरे चाहाने वालो के, किस्से बहुत मशहूर है। तेरी एक झलक के लिए, खड़े रहते है लाइन से। चेहरा छुपाना दुपट्टे से लोगो की समझ से परे है। कैसे देख सकेंगे वो तुझे, खुले आसमान के नीचे।। किसी पर तो… Read More
गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे, चरणों में अपने हमको बैठा लो। सेवा में अपनी हमको लगा लो, गुरुदेव मेरे गुरुदेव मेरे। मुझको अपने भक्तो की दो सेवादारी। आयेंगे सत संघ सुनने, जो भी नर नारी, मै उनका सत्कार करूँगा, बंधन बारंबार… Read More
याद रखना तुम मुझसे करते हो प्यार। याद रखना तुम आओगे मिलने इस बार।। तड़पता हूँ सोया नहीं, मुस्कुराना मैं भूल गया। हंसता था सदा, कहना मैं भूल गया।। याद रखना अब से मैं खामोश हूं यार।।। याद रखना तुम… Read More
“अक्ल को तन्कीद से फुर्सत नहीं इश्क़ पर आमाल की बुनियाद रख” हाल ही में एक फ़िल्म आयी है चमनबहार जिसमें नायक अपनी जीतोड़ मेहनत सी की कमायी गयी अल्प पूंजी पर अपने मन के उदगार लिखते हुए लिखते हुए… Read More
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस अभी अपने सबसे बुरे दिनों से गुजर रही है। इसके कई कारण गिनाए जा सकते हैं लेकिन एक बड़ा कारण यह भी है कि कांग्रेस में लोकतांत्रिक ढंग से पार्टी में पदाधिकारियों के… Read More
खेल में नहीं होता हैं कोई हिन्दू मुसलमान खेल में नहीं होता हैं ऊँचा नीचा महान खेल हैं सद्भावना मिल जाता हैं जिसमें सभी खेल में बन जाता हैं इंसान बस इंसान खेलने वालों ने दुनियाँ एक कर दी खेलकर… Read More