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mai pita nahin

कविता : कैसे कहूँ पीता नहीं

कैसे कह दूं कि मैं पीता नही हूँ। रोज जीने के लिए मैं पीता हूँ। जिंदगी में इतना सहा है हमने। न पीते तो कब के मर गए होते।। बड़ी ही जालिम है ये दुनियाँ। छेड़े बिना लोग रह नहीं… Read More

mohabbat

ग़ज़ल : ख़ुदी से ज़िदगी में एक भूल कर बैठे

ख़ुदी से जिंदगी में एक भूल कर बैठे वफ़ा-ए-इश्क़ मे ख़ुद को फ़ुज़ूल कर बैठे ये सोचते थे कि खुशबू कभी तो आएगी ख़िज़ाँ के मौसमों में ये मलूल कर बैठे यही तो होना था अंजाम आज़माने का, तबाह कर… Read More

ji kar dekhege

ग़ज़ल : हम भी मर के देखेंगे

न किया जो अब तलक,वो कर के देखेंगे अब हम भी किसी पर यारों,मर के देखेंगे ज़िन्दगी गुज़ार दी बस तन्हाइयों में हमने, अब मोहब्बत का दरिया में भी,उतर के देखेंगे हमने देखे हैं जाने कितने ज़फाओं के मारे अब… Read More

sas bahu

कविता : सास बहू का रिश्ता

सास बहू का रिश्ता में तुम को समझता हूँ। हर घर की कहानी तुमको मैं सुनाता हूँ। सुनकर कुछ सोचना, और कुछ समझना। सही बात यदि मैंने कहीं हो तो बता देना।। सास-बहू का रिश्ता बड़ा अजीब होता है। बहू… Read More

chamcha

व्यंग्य : “शाह का चमचा”

“बने है शाह का चमचा, फिरे है इतराता वरना आगरे में ग़ालिब की हस्ती क्या है” मशहूर शायर मिर्जा गालिब ने जब ये फरमाया था तब बादशाह की उनपे नूरे नजर थी, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट बदली कि मिर्जा… Read More

ravan

गीत : रावण को भी सुने

रावण कहता है एक बात मेरी सुन लो। क्यों वर्षो से मुझे यूं जलाये जा रहे हो। फिर भी तुम मुझे जला नहीं पा रहे हो। हर वर्ष जलाते जलाते थक जाओगे। और एक दिन खुद ही जल जाओगे।। मैंने… Read More

gyan

कविता : पहचान

हृदय में करुणा भर कर सबका सम्मान रूप और यौवन पर मत कर अभिमान परिश्रम से ही होता हर स्वप्न साकार ईर्ष्या और घृणा से मिलता नहीं प्यार ज्ञान से ही संभव है मनुज का उत्थान कर्मों से ही बनती… Read More

dost

ग़ज़ल : तो अच्छा होता

कभी आगे का ख़्याल करते, तो अच्छा होता कभी गुज़रा भी याद करते, तो अच्छा होता उजाड़ने का क्या है उजाड़ दो बस्तियां सारी, कभी तो कुछ आबाद करते, तो अच्छा होता औरों की अमानत को न उड़ाइये यारों में… Read More

rishte

कविता : रिश्तों को बनाये रखें

रिश्तो का बंधन कहीं छूट न जाये। और डोर रिश्तों की कहीं टूट न जाये। रिश्ते होते है बहुत जीवन में अनमोल। इसलिए रिश्तो को हृदय में सजा के रखें।। बदल जाए परिस्थितियाँ भले ही जिंदगी में। थाम के रखना… Read More

fitrati duniya

ग़ज़ल : बड़ी फ़ितरती है दुनियाँ

बड़ी ख़ुदग़र्ज़,बड़ी फ़ितरती है दुनियाँ, नफ़रतों के खम्बों पर,टिकी है दुनियाँ। किसी को ग़म नहीं धेले भर किसी का, ये बड़ी ही बेरहम,और बेरुख़ी है दुनियाँ। अब तो जीते हैं लोग बस अपने लिए ही, यारों औरों के लिए,मर चुकी… Read More