बात कुछ साल पुरानी है। गुजरात के आगे के स्टेशन से एक स्त्री दो बच्चो को गोद में लिए चढ़ी । कम उम्र की जान पढ़ रही थी। जिस बोगी में थे हम वह भी उसी बोगी में बैठी। उसके… Read More
बात कुछ साल पुरानी है। गुजरात के आगे के स्टेशन से एक स्त्री दो बच्चो को गोद में लिए चढ़ी । कम उम्र की जान पढ़ रही थी। जिस बोगी में थे हम वह भी उसी बोगी में बैठी। उसके… Read More
रिश्तों की तुरपाई को जरा सहज कर रखना। सम्बन्धों की सिलाई अच्छे से की जानी चाहिए, नहीं तो क्या पता किस वक़्त पर यह उधड़ जाए और रिश्तों में दरार पड़ जाए।* *वक़्त का गम नहीं यह क्या करवाएगा ,… Read More
वो ज्ञान की माता है सरस्वती नाम है उनका-२। वो विद्या की माता है। शारदा माता नाम उनका। वो ज्ञान की माता है।। हाय रे मनका पागलपन मुझ से लिखवाता है। क्या मुझे लिखना क्या वो लिखवाता ये तो वो… Read More
एक बरस में मौसम चार, यह फिल्मी गाना बहुत लोकप्रिय है। जहाँ पाँचवे मौसम के रुप में ‘प्यार” के मौसम की बात होती है।जब हम इस पाँचवे मौसम की तह तक जाते है तो इस भाव को व्यक्त करने के… Read More
“देश को जिसने हमें सौंपकर बदले में सिर्फ मौत पाई कैसे न करें हम उन्हें याद, मौका परस्त कहलाएगा गर आज उनकी याद न आई।।” आज पुलवामा अटैक को 2 वर्ष पूरे हो गए , जिसमे हमारे देश के कई… Read More
मज़बूर हूँ मैं। मगर ये मत समझना, कि कमज़ोर हूँ। मज़बूत हूँ मैं, साथ ही ग़रीब हूँ। मगर लाचार नहीं।। तेरे शोषण का सुबूत हूँ मैं, तेरी ही पहचान हूँ मैं। फिर भी अपनों के लिए कार्य कर रही हूँ।… Read More
बसंत की बेला आई मन में महक जगाई अब तू भी जी ले कुछ पल को मन में यह फूल खिलाई बसंत की बेला आई।। मन की बागियों में अब तू हंसियो के फूल खिला दें यादों की सोंधी सी… Read More
नदियाँ खुद अपनी चाल से रास्ते बना लेती है। बड़े-बड़े पहाड़ों को भी चीर कर आगे निकल जाती है। क्योंकि उन्हें अपने आप पर विश्वास होता है। इसलिए उन्हें आदर से पूजा जाता है।। इरादे हो अगर नेक तो मंजिले… Read More
सोच बदलो गाँव बदलो अब चलो गाँव में। तभी हम गाँवो को खुशहाल बना पाएंगे। और नया हिंदुस्तान हम मिलकर बनाएंगे। और गाँवो का इतिहास एक बार फिर से दोहरायेंगे। गाँवो की मिट्टी का कोई जवाब नहीं है। पैरो में… Read More