manzile

नदियाँ खुद अपनी चाल से
रास्ते बना लेती है।
बड़े-बड़े पहाड़ों को भी चीर
कर आगे निकल जाती है।
क्योंकि उन्हें अपने आप
पर विश्वास होता है।
इसलिए उन्हें आदर से
पूजा जाता है।।

इरादे हो अगर नेक तो
मंजिले स्वयं रास्ता देखती है।
और मुसाफिर को उसकी
मंजिल तक पहुँचाती है।
मत डर रास्तो के काँटों से
ये तेरा कुछ नहीं कर पाएंगे।
और तेरी मंजिल तुझे
निश्चित ही मिल जायेगी।।

अंधेरे घरों में कभी
रोशनी करके देखो।
उजड़े हुए बागो को
कभी आवाज करके देखो।
आशा की शायद कोई
किरण नजर आ जायेगी।
और मुरझाएँ हुये चेहरो पर
फिर से चमक दिख जायेगी।।

है अगर हौसले बुलन्द तो
पत्थरो में से पानी निकाल लेते है।
खंडर पड़े घरों को भी
रहने योग्य बना लेते है।
करनी और करने में
जो विश्वास रखता है।
जिंदगी को जीने का
खुद मार्ग बना लेते है।।

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