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ग़ज़ल : मेरा गम तो छुपा है आंखो में

मेरा गम तो छुपा है आंखो में एक तू ही तो है निगाहों में।। अब मेरा इम्तिहान मत लेना जिसके ख्वाबों से दूर रहती हूं, दरअसल वो ही ख़्वाब है तु मेरा।। देख क्या इंतखाब है मेरा लब पे मैने… Read More

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लेख : वक्त के साथ आगे बढ़ते नारी के कदम

“नारी यदि वर्तमान के साथ भविष्य को भी अपने हाथ में ले ले तो वह अपनी शक्ति से बिजली की तड़क को भी लज्जित कर सकती है।” जब नारी अपने कदम आगे बढ़ाती हैं , तो वह कही इतिहास लिख… Read More

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कविता : अनजान पहेली

एक पहेली सी हो तुम थोड़ी सी जानी पहचानी पास रहती मगर अनजानी सी ।। खुद को समेटे कुछ कहती हुई नज़रे झुकाएं हर वक़्त मुस्कुराती हुई।। चन्द लम्हों में चुरा लेती मुझको दूर हो के हर वक़्त सताती मुझको।।… Read More

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कविता : जीवन के रंग

जीवन के अलग ढ़ंग है, उसमे बिखरे अनेकों रंग है। प्रकृति का अलग राग है, उसमे अलग ताब है।। प्रकती का तपन मानव को जीवन राग दिखाता है, जीवन में अनेकों रंग दर्शाता है।। प्रकृति में हर कहीं बिखरे है… Read More

barish

दोहा : पावस

पावस आते मन ठहर, भीगे बदन मेरे। समूचा माहौल खुला, याद पनपे तेरे।। भीगा बदन बरसाएं, रिमझिम बारिश हुआ। साजन चले आते हैं, जब बरस बता रहा।। नन्हा पौध रोपण में, जमीन गीली हुईं। अस्तित्व बचाने में, बरसात कहीं गई।।… Read More

alone (2)

कविता : माटी का खिलौना

तू माटी का एक पुतला है तुझे माटी में ही मिलना है। बस कट पुतली बनकर ही तुझे ये मानव जीवन जीना है। और मानव के इस पुतले को इस खिलौने से खेलना है। फिर कुछ बर्षो उपरांत तुझे उसी… Read More

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लेख : सीक्वल के भरोसे ओटीटी

ओटीटी प्लेटफॉर्म की शुरुआत जब देश में हुई तो किसी को इतना अंदाजा नहीं था कि यह अपनी पकड़ भारतीय दर्शकों पर इतनी ज्यादा बना देगा ।शुरुआती वेब सीरीज को देखकर लगा कि बस कुछ एक कंटेंट ऐसे हैं जिन्हें… Read More

nariskti

कविता : नारी

करुणा सागर को धार बनाकर तुम भी लहरों सी हुंकार भरो जाज्वल्यमान ज्वाला बन कर मन के तम का संहार करो अबला ना समझो सबल हो तुम । नारी होने का अभिमान करो ।। उठो निडर तुम बढ़ो निडर तुम… Read More

woman(1)

कविता : मन की बात

मन की बातों को छुपा लिया पर नयनों को क्या समझाओगे अधरों मे दबे अपने भावो को जब शब्दों मे ना कह पाओगे तुम जो कहते थे मेरे जीवन में हर शब्द तुम्हीं हर भाव तुम्ही हो मेरी शक्ति मेरी… Read More

bhasa(1)

कविता : भाषा

अलग है मेरी भाषा तुम्हारी भाषा से, अलग है दुनिया में मनुष्यों की भाषा कई रूप हैं भाषा के, पुस्तक की भाषा बोलचाल की भाषा, श्रम की भाषा मूक-गूँगे की भाषा, शरीर की भाषा माँ की भाषा, परिवार की भाषा… Read More