श्रेणी

happy mothers day

कविता : माँ इन चंद पन्नों में तुझे लिख नही सकता

माँ इन चंद पन्नों में तुझे लिख नही सकता । माँ का सिर्फ एक दिन हो ऐसा कह नही सकता । माँ.. माँ हर पल है हर सांस है हर दिन, हर महीना हर साल है माँ.. माँ नदिया है… Read More

कविता : मिट्टी का पुतला

आदमी मिट्टी का पुतला है और जो चीज मिट्टी से बनती है वह मिट्टी में ही मिल जाती है किंतु इस तरह से मिल जाना मिट्टी में कि कोई कंधा देने वाला भी न हो कुछ हजम नहीं होता। संक्रमण… Read More

sharwan kumar

गीत : पुत्र धर्म निभाये

कितनो के पुत्र आजकल, करते मां बाप की सेवा। सब कुछ उन पर लूटकर, खुद बन जाते है भिक्षुक।। और पुत्र इन सब का, कैसे अदा करते है कर्ज। भेज उन्हें बृद्धाश्रम में, फिर भी कहलाते पुत्र।। कलयुग की महिमा… Read More

सामंतवाद की विषबेल : क्या गांव क्या शहर

बहुत सारे लोगों की ये शिकायत रहती है कि गरीब मजदूर लोग अपने गांव मे ही क्यों नही मजदूरी करते, बाहर क्यों चले जाते हैं? इस विषय पर आगे बढ़ने के पहले कल के अखबार का संज्ञान लेना चाहूँगा। अभी हाल… Read More

गीत : वतन से प्यार

निभा गये मोहब्बत हम   वतन से कुछ इस तरह। छुड़ा दिये छक्के हमने दुश्मनों के जंग में। पड़ गया भारी उसे कायराना हमला ये। जब जवाब से पहले ही टेक दिए घुटने उसने। आओ मिलकर हम सब खाये एक कसम।… Read More

कविता : भव्य होना एक बात है

सभ्यताओं का भी अपना ही हिसाब होता है अपना ही ढंग होता है अपने ही ढंग से बनती हैं सभ्यताएं अपने ही ढंग से ढहती हैं सभ्यताएं। ढहने के साथ ही कुछ सभ्यताएं अपने पीछे छोड़ जाती हैं ऐसे चिन्ह… Read More

लेख : भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का प्रभाव

यद्यपि पूरे विश्व मे कोरोना महामारी का आर्थिक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा, उसके बाद भी भारत की स्थिति अभी उतनी विकट नही है, जहां बड़े बड़े विकसित देशों पर इसके प्रभाव पड़ रहा,वहाँ भारत जैसी मिश्रित… Read More