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राजकीय महाविद्यालय, बदायूँ में भाषण प्रतियोगिता

22.09.2019 को तुलसी साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था बदायूँ के तत्वावधान में राजकीय महाविद्यालय में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें संस्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आमोद मिश्रा की अध्यक्षता एवं देख रेख में संपन्न हुई। मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता हरिप्रताप… Read More

‘जिउतिया’

भोरे भोरे माई पीठ थपथपा के कहली। ए बाबू उठ हो सरगहि के बेरा हो गईल बा। हम चिहा के उठनी त थरिया में दही चिउरा रखल रहे। माई कहली ल परसादी खा लअ। हम कहनी रुकअ दतुवन क के… Read More

क्या कहते हैं बदायूं के साहित्यकार हिंदी दिवस पर

 14 सितंबर से हिंदी पखवाड़ा दिवस शुरू हुआ है तो बदायूं के सभी साहित्यकारो ने एक मत होकर कहा  कि आज के दिन ही भारतीय संविधान सभा द्वारा हिंदी को राज्य की भाषा के रूप में स्वीकार किया गया वरन्… Read More

मेरी बेटी, मेरी जान

मेरी बेटी, मेरी जान ! तुम सर्दी में इतनी सुंदर क्यों हो जाती हो मेरी बेटी गोल-मटोल स्कार्फ बांध कर नन्हीलाल चुन्नी जैसी नटखट क्यों बन जाती हो मेरी बेटी मेरी बेटी, मेरी जान, मेरी भगवान, मेरी परी, मेरी आन,… Read More

सोनाक्षी सिन्हा ही क्यों ?

यू ट्यूब पर जाइए हजारों वीडियो मिल जाएंगे जहां लोग वैलेनटाईन डे का इतिहास बता दे रहे हैं मगर उन्हें 26 जनवरी गणतंत्रत दिवस और 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस में फर्क नहीं पता। यहां तक कि ये भी नहीं पता… Read More

हिंदी के स्वीकार से शिक्षा का सामान्यीकरण

कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, शिवाजी नगर (गढी), जिला बीड के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समापन समारोह (16 सितंबर, 2019) में प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. मजीद शेख को निमं‍त्रित किया गया था। इनके द्वारा… Read More

मूवी रिव्यू : ज़ीरो डिग्री टेम्परेचर वाली फ़िल्म ‘पल पल दिल के पास’

आज से 36 साल पहले ‘बेताब’ फ़िल्म के ढाई किलो के हाथ वाले डायलॉग से आज भी सिने प्रेमियों के दिल में जगह कायम रखने वाले सनी देओल के बेटे करण देओल ने सिनेमा की दुनिया में कदम रख दिया… Read More

एक छुअन : दो गीत

 यह दोनों गीत 1987 में लिखे गए थे । इन गीतों की एक पृष्ठभूमि थी । डॉ. धर्मवीर भारती ने इन दोनों गीतों को धर्मयुग के 15 मार्च 1987 अंक में पृष्ठ 19 पर छापा था । आज पत्रिकाओं के… Read More

मूवी रिव्यू : विश्वास और अंधविश्वास का द्वंद है ‘द जोया फैक्टर’

द जोया फैक्टर बनाने वाले अभिषेक शर्मा ‘तेरे बिन लादेन’ और ‘शौकीन’ जैसी हलकी-फुलकी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। उन्होंने न्यूक्लियर टेस्ट की सच्ची घटना पर आधारित ‘पोखरण’ का निर्देशन भी किया था। इस बार ‘द जोया फैक्टर‘ के… Read More

मूवी रिव्यू : ‘रुख’

एक ऐसी फिल्म जो आपको एक अलग अनुभव प्रदान करती है, यह भी बताती है कि जीवन कितना कठिन हो सकता है लेकिन अगर आप सामना करने के लिए तैयार हैं तो सब आसान हो जाता है। एक ऐसी थ्रिलर… Read More