बहुत सारे लोगों की ये शिकायत रहती है कि गरीब मजदूर लोग अपने गांव मे ही क्यों नही मजदूरी करते, बाहर क्यों चले जाते हैं? इस विषय पर आगे बढ़ने के पहले कल के अखबार का संज्ञान लेना चाहूँगा। अभी हाल… Read More
बहुत सारे लोगों की ये शिकायत रहती है कि गरीब मजदूर लोग अपने गांव मे ही क्यों नही मजदूरी करते, बाहर क्यों चले जाते हैं? इस विषय पर आगे बढ़ने के पहले कल के अखबार का संज्ञान लेना चाहूँगा। अभी हाल… Read More
निभा गये मोहब्बत हम वतन से कुछ इस तरह। छुड़ा दिये छक्के हमने दुश्मनों के जंग में। पड़ गया भारी उसे कायराना हमला ये। जब जवाब से पहले ही टेक दिए घुटने उसने। आओ मिलकर हम सब खाये एक कसम।… Read More
सभ्यताओं का भी अपना ही हिसाब होता है अपना ही ढंग होता है अपने ही ढंग से बनती हैं सभ्यताएं अपने ही ढंग से ढहती हैं सभ्यताएं। ढहने के साथ ही कुछ सभ्यताएं अपने पीछे छोड़ जाती हैं ऐसे चिन्ह… Read More
यद्यपि पूरे विश्व मे कोरोना महामारी का आर्थिक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा, उसके बाद भी भारत की स्थिति अभी उतनी विकट नही है, जहां बड़े बड़े विकसित देशों पर इसके प्रभाव पड़ रहा,वहाँ भारत जैसी मिश्रित… Read More
“परनिंदा जे रस ले करिहैं निसच्य ही चमगादुर बनिहैं” अर्थात जो दूसरों की निंदा करेगा वो अगले जन्म में चमगादड़ बनेगा। परनिंदा का अपना सुख है,ये विटामिन है,प्रोटीन डाइट है और साहित्यकार के लिये तो प्राण वायु है। परनिंदा एक… Read More
खुले आसमान के नीचे जब भी मैं चाँद को निहारती हूँ । मन ही मन बस यही सोचती और विचारती हूँ ॥ इतनी शीतल इतनी निश्छल कोई कैसे हो सकती है । माँ वो है जिसके आशीष से मेरी जीवन… Read More
!! अम्मा !! अम्मा ! तुझ बिन सब है झूठा। मेरी ख़ातिर अम्मा मेरी, तूने कितने दुःख झेले थे। तेरी स्नेहमयी गोदी में, उझल-उझल के हम खेले थे। नियती ने सब खेल बिगड़ा, कालग्रास ने सपना लूटा। अम्मा तुझ बिन… Read More
‘मां’ इस शब्द का मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है । वैसे तो हर किसी पर रहता है, सही तथा गलत दोनों मायनों में । मां के कारण ही अनाथ बच्चों को भी बनते देखा है और मां के… Read More