श्रेणी

सामंतवाद की विषबेल : क्या गांव क्या शहर

बहुत सारे लोगों की ये शिकायत रहती है कि गरीब मजदूर लोग अपने गांव मे ही क्यों नही मजदूरी करते, बाहर क्यों चले जाते हैं? इस विषय पर आगे बढ़ने के पहले कल के अखबार का संज्ञान लेना चाहूँगा। अभी हाल… Read More

गीत : वतन से प्यार

निभा गये मोहब्बत हम   वतन से कुछ इस तरह। छुड़ा दिये छक्के हमने दुश्मनों के जंग में। पड़ गया भारी उसे कायराना हमला ये। जब जवाब से पहले ही टेक दिए घुटने उसने। आओ मिलकर हम सब खाये एक कसम।… Read More

कविता : भव्य होना एक बात है

सभ्यताओं का भी अपना ही हिसाब होता है अपना ही ढंग होता है अपने ही ढंग से बनती हैं सभ्यताएं अपने ही ढंग से ढहती हैं सभ्यताएं। ढहने के साथ ही कुछ सभ्यताएं अपने पीछे छोड़ जाती हैं ऐसे चिन्ह… Read More

लेख : भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का प्रभाव

यद्यपि पूरे विश्व मे कोरोना महामारी का आर्थिक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा, उसके बाद भी भारत की स्थिति अभी उतनी विकट नही है, जहां बड़े बड़े विकसित देशों पर इसके प्रभाव पड़ रहा,वहाँ भारत जैसी मिश्रित… Read More

व्यंग्य : वादा तेरा वादा

“परनिंदा जे रस ले करिहैं  निसच्य ही चमगादुर बनिहैं”  अर्थात जो  दूसरों की निंदा करेगा वो अगले जन्म में चमगादड़ बनेगा। परनिंदा का अपना सुख है,ये विटामिन है,प्रोटीन डाइट है और साहित्यकार के लिये तो प्राण वायु है। परनिंदा एक… Read More

happy mothers day

कविता : माँ वो है जिसके आशीष से मेरी जीवन जोत जलती है

खुले आसमान के नीचे जब भी मैं चाँद को निहारती हूँ । मन ही मन बस यही सोचती और विचारती हूँ ॥ इतनी शीतल इतनी निश्छल कोई कैसे हो सकती है । माँ वो है जिसके आशीष से मेरी जीवन… Read More

happy mothers day

कविता : अम्मा ! तुझ बिन सब है झूठा

!! अम्मा !! अम्मा ! तुझ बिन सब है झूठा। मेरी ख़ातिर अम्मा मेरी, तूने कितने दुःख झेले थे। तेरी स्नेहमयी गोदी में, उझल-उझल के हम खेले थे। नियती ने सब खेल बिगड़ा, कालग्रास ने सपना लूटा। अम्मा तुझ बिन… Read More

Happy Mother's Day

हैप्पी मदर्स डे : ‘मां’ आपके बिना मैं कुछ नहीं

‘मां’ इस शब्द का मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है । वैसे तो हर किसी पर रहता है, सही तथा गलत दोनों मायनों में । मां के कारण ही अनाथ बच्चों को भी बनते देखा है और मां के… Read More