आदमी मिट्टी का पुतला है और जो चीज मिट्टी से बनती है वह मिट्टी में ही मिल जाती है किंतु इस तरह से मिल जाना मिट्टी में कि कोई कंधा देने वाला भी न हो कुछ हजम नहीं होता। संक्रमण… Read More
आदमी मिट्टी का पुतला है और जो चीज मिट्टी से बनती है वह मिट्टी में ही मिल जाती है किंतु इस तरह से मिल जाना मिट्टी में कि कोई कंधा देने वाला भी न हो कुछ हजम नहीं होता। संक्रमण… Read More
कितनो के पुत्र आजकल, करते मां बाप की सेवा। सब कुछ उन पर लूटकर, खुद बन जाते है भिक्षुक।। और पुत्र इन सब का, कैसे अदा करते है कर्ज। भेज उन्हें बृद्धाश्रम में, फिर भी कहलाते पुत्र।। कलयुग की महिमा… Read More
बहुत सारे लोगों की ये शिकायत रहती है कि गरीब मजदूर लोग अपने गांव मे ही क्यों नही मजदूरी करते, बाहर क्यों चले जाते हैं? इस विषय पर आगे बढ़ने के पहले कल के अखबार का संज्ञान लेना चाहूँगा। अभी हाल… Read More
निभा गये मोहब्बत हम वतन से कुछ इस तरह। छुड़ा दिये छक्के हमने दुश्मनों के जंग में। पड़ गया भारी उसे कायराना हमला ये। जब जवाब से पहले ही टेक दिए घुटने उसने। आओ मिलकर हम सब खाये एक कसम।… Read More
सभ्यताओं का भी अपना ही हिसाब होता है अपना ही ढंग होता है अपने ही ढंग से बनती हैं सभ्यताएं अपने ही ढंग से ढहती हैं सभ्यताएं। ढहने के साथ ही कुछ सभ्यताएं अपने पीछे छोड़ जाती हैं ऐसे चिन्ह… Read More
यद्यपि पूरे विश्व मे कोरोना महामारी का आर्थिक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा, उसके बाद भी भारत की स्थिति अभी उतनी विकट नही है, जहां बड़े बड़े विकसित देशों पर इसके प्रभाव पड़ रहा,वहाँ भारत जैसी मिश्रित… Read More
“परनिंदा जे रस ले करिहैं निसच्य ही चमगादुर बनिहैं” अर्थात जो दूसरों की निंदा करेगा वो अगले जन्म में चमगादड़ बनेगा। परनिंदा का अपना सुख है,ये विटामिन है,प्रोटीन डाइट है और साहित्यकार के लिये तो प्राण वायु है। परनिंदा एक… Read More
खुले आसमान के नीचे जब भी मैं चाँद को निहारती हूँ । मन ही मन बस यही सोचती और विचारती हूँ ॥ इतनी शीतल इतनी निश्छल कोई कैसे हो सकती है । माँ वो है जिसके आशीष से मेरी जीवन… Read More