कविता : वो चला गया, अपने गाँव

“श्रमिक एक्सप्रेस” खुल गई है शहर, तुम ख़ुश रहो वो चला गया, अपने गाँव वही, जिसे तुम मज़दूर कह कर दया से भर रहे थे। वही, जो न जाने कितने सालों से अपने पसीने को मेहनत की भट्टी में पकाकर… Read More

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कविता : बेटा बनवारी खूब मन लगा के

बेटा बनवारी ! खूब मन लगा के पढ़ो तनिक बेटा बनवारी खूब मन लगा के…. जितना चली तोहार हाथ, तबे बनी कोई बात, काम मिली सरकारी ख़ूब मन लगा के… गॉव नागरिआ के एके पढ़वइया बचपन मे दूर भईले बाप… Read More

kavita hai bhai mera police

कविता : है भाई मेरा पुलिस

मुझसे ज़्यादा खुद को कभी तोलना नहीं है भाई मेरा पुलिस, कुछ बोलना नहीं । तेरे दिल में छुपे राज़ मेरे खोलना नहीं है भाई मेरा पुलिस कुछ बोलना नहीं। पुलिस लाइन का छोरा, स्कूल में अपनी मौज थी पढ़ने… Read More

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कविता : जो कुछ भी दे जिंदगी

जो कुछ भी दे जिंदगी, उसे आपस में बाँट लो। अपना हक़, अपना हिस्सा, सब बराबर माप लो।। दुःख हो, या सुख, गम्म हो या हो ख़ुशी। सबके अपने आँसू हैं, सबकी अपनी हंसी। भाग्य की अपनी किस्मत नहीं, कर्म… Read More

कविता : कोरोना इंपेक्ट

नीद में हूँ मगर सोने नही देता ।  करोना है कि बाहर जाने नही देता । मैं मर जाऊ मुझे कोई गम नही, डर है कि अपनों को रोने नही देता । ख़ौफ़ इतना कि ख़्वाबों में ख़ौफ़ है ।… Read More

कविता : शमा जाऊँगी

कभी उन्होंने देखा ही नही,  मुझे उस नजर से। जिसकी मैं उनसे, चाहत रखती हूँ। हूँ खूबसूरत तो क्या, जब उनकी निगाहें। मुझे पर ठहरती नहीं। तो क्या जरूरत ऐसे, रूप और यौवन का ? चंदन सा सुगन्धित मेरा बदन।… Read More

कविता : पिता क्या होते हैं?

अंदर ही अंदर घुटता है। पर ख्यासे पूरा करता है। दिखता ऊपर से कठोर। पर दिलसे नरम होता है। ऐसा एक पिता होता है।। कितना वो संघर्ष है करता। पर उफ किसी से नहीं करता। लड़ता है खुद जंग हमेशा।… Read More

कविता : भावनाओं से मत खेलो

न राम चाहिए, न श्याम चाहिए। हम लोगो को तो, कोरोना से निजात चाहिए। है कोई ऐसा मंत्र, अब तांत्रिकों पर। जो इसका बीमारी का इलाज कर सके।। भविष्यवाणी करने वालो, कहा पर तुम सब सो गये। क्या अब कोरोना… Read More

कविता : जय श्री राम

त्याग का पर्याय  प्रतीक शौर्य का  पुरुषों में उत्तम संहर्ता क्रौर्य का परहित प्रियता  भ्राताओं में ज्येष्ठ  कर्तव्य परायण नृप सर्वश्रेष्ठ शरणागत वत्सल  हैं आश्रयदाता  दशरथ नंदन भाग्य विधाता भजे मुख मेरा  तेरा ही नाम  जय सिया राम जय श्री… Read More

कविता : कुछ दिन

जहाँ से इसकी शुरुआत हुई उस शहर का नाम वुहान है, आज महामारी बन चुका है ये और चपेट में सारा जहान है। दफ्तर बन्द हो गए सभी और सड़के भी वीरान है, घरों में दुबक चुके हैं लोग और… Read More