भावाभिव्यक्ति का ज्ञान नहीं केवल वक्ष व नितंब हिलाती है फूहड़ गीतों पर हुड़दंग मचा समाज में अश्लीलता फैलाती है उघाड़ती है जितना तन अपना दर्शकों से उतना धन वो पाती है नग्नता ही होती है आधुनिकता अपने कुतर्कों से… Read More
भावाभिव्यक्ति का ज्ञान नहीं केवल वक्ष व नितंब हिलाती है फूहड़ गीतों पर हुड़दंग मचा समाज में अश्लीलता फैलाती है उघाड़ती है जितना तन अपना दर्शकों से उतना धन वो पाती है नग्नता ही होती है आधुनिकता अपने कुतर्कों से… Read More
हे मेरे परम पूजनीय बाप ! आखिर कब तक वानप्रस्थ लेंगे आप ? यदि अभी आप सन्यास ले लेते, बेटे पर अपने उपकार तो कर जाते | खांस-खांस कर शोर मचाते और, नकली दांत कटकता रहें हैं | रीटायर होने… Read More
प्रेम एक एहसास है | प्रेम, मेरी धड़कन, मेरी हर श्वाँस है | क्या है यह एहसास ? वो ख्या बता पायेगा ? जो इसका अर्थ हीं ना जान पाया, और बनाता है काम-आसक्ती से इसका मजाक | प्रेम- एक… Read More
रौनक भरी उनकी इस महफ़िल में, उनके लिए मेरा मन क्यों उदास है? खड़ें हैं सामने उनके सभी भीड़ में, नहीं वो क्यों मेरे पास हैं? चारों ओर शोर ठहाका नजारों में, पर होंठ क्यों मेरे चुपचाप हैं? सभी व्यस्त… Read More
बहुत दूर है तुम्हारे घर से, हमारे घर का किनारा। पर हवा के हर झोके से। पूंछ लेते है मेरी जान, हाल चाल तुम्हारा।। लोग अक्सर कहते है। जिन्दा रहे तो फिर मिलेंगे। पर मेरी जान कहती है। की निरंतर… Read More
रात भर सपनों में खुशहाल संसार देखा, सुबह हुई तो काँच सा बिखरा हुआ मंजर देखा, चहुं ओर चिल्लाती चिखती खामोशी दिखी, वही काँपती हाथ और वही बिफरा मजदूर दिखा | चाहता है ‘मनोहर’ भी, हर मजदूर का लेखा बदलना,… Read More
प्यास बुझाये अरमानों की जो, जी लें हम एक क्षण वो, क्यों ज़िन्दगी का वह एक क्षण नहीं मिलता ? तन का मिलना भी क्या मिलना, जो मन से समर्पन नहीं मिलता, क्यों ज़िन्दगी में वह प्रेम का क्षण नहीं… Read More
चाहकर भी मैं भूल, नहीं सकता तुम्हें। देख कर अनदेखा, कर सकता नही तुम्हें। दिलकी धड़कनों को, कम कर सकता नहीं। क्योंकि ये दिल है, जो मानता ही नही।। माना कि मुझ से, नफरत है तुम्हें। मेरी बातें से तुम्हें,… Read More
क्यों एक पल भी तुम बिन रहा नहीं जाता। तुम्हारा एक दर्द भी मुझसे सहा नहीं जाता। क्यों इतना प्यार दिया तुमने मुझ को। की तुम बिन अब जिया नहीं जाता।। तुम्हारी याद आना भी कमाल होता है। कभी आकर… Read More
मेरे दिल में अंकुरित हो तुम। दिल की डालियों पर खिलते हो। और गुलाब की पंखड़ियों की तरह खुलते हो तुम। कोई दूसरा छू न ले तुम्हें इसलिए कांटो के बीच रहते हो तुम। फिरभी प्यार का भंवरा कांटों के… Read More