कविता : मिथिला

मिश्री जैसी मधुर है हमारी बोली हम प्रेमी पान मखान और आम के भगवती भी जहाँ अवतरित हुईं हम वासी हैं उस मिथिला धाम के संतानों को जगाने मिथिला की माएँ सूर्योदय से पूर्व गाती हैं प्रभाती सुनाकर कहानियाँ ज्ञानवर्धक… Read More

poem bolta hu mai

कविता : बोलता हूँ मैं

मैं समाज से बोलता हूँ दुनिया से बोलता हूँ मनुष्य से बोलता हूँ मेरे पास वह शक्ति नहीं उन भेड़ियों से बोलने का कुटिल तंत्रों के साथ लड़ने का होने दो मुझ पर इनके नादान परिहास रचने दो मंत्र –… Read More

Poem Mithila Dham

कविता : हमारा मिथिला सबसे महान

मिश्री जैसी मधुर है हमारी बोली हम प्रेमी पान मखान और आम के भगवती भी जहाँ अवतरित हुईं हम वासी हैं उस मिथिला धाम के संतानों को जगाने मिथिला की माएँ सूर्योदय से पूर्व गाती हैं प्रभाती सुनाकर कहानियाँ ज्ञानवर्धक… Read More

poem mohabbat samjhte nahi

कविता : मोहब्बत समझते नहीं

तेरी यादों को अब तक, दिल से लगाये बैठा हूँ। सपनो की दुनियां में, अभी तक डूबा हुआ हूँ। दिलको यकीन नही होता, की तुम गैर की हो चुकी हो। और हकीकत की दुनियां से, बहुत दूर निकल गई हो।।… Read More

poem anubhav mere jeevan ka

कविता : अनुभव मेरे जीवन का

आँखे झूठी, बातें झूठी, चेहरा सारा झूठा है, बाहर अंदर सारा झूठा, ईमां ही तेरा झूठा है । इस चेहरे के उपर न जाने, और भी कितनी कालिमाई है, कपट की लहरें तेरे भीतर, ना जाने कितनी गहराई हैं ।… Read More

kavita chot apno ki

कविता : चोट अपनों की

सोने ने पुछा एक दिन लोहे से, तू चोट लगने पर इतना चिल्लाता क्यूं है? जबकि सुनार मुझे भी तो, हतौडे से ही चोट मारता है । इतना सुनना था कि लोहे का मुख मलीन हो गया, मामला अत्यंत संगीन… Read More

Time will pass

कविता : समय निकल जायेगा

दिल से दिल मिलाकर देखो। जिंदगी की हकीकत को पहचानो। अपना तुपना करना भूल जाओगे। और आखिर एक ही पेड़ की छाया के नीचे आओगे। और अपने आप को तुम तब अपने आप को पहचान पाओगे।। क्योकि छोड़कर नसवार शरीर,… Read More

kavita-abhilasha-vidai-ke-samay

कविता : अभिलाषा विदाई के समय

इस विदाई की बेला मे, कहता हूँ उपस्थित सभी से, करने की ईश्वर से प्रार्थना, करने की जीवन में कुछ ऐसा, जो कल्याणकारी और आदर्श हो सबका, करें आज हम समय से यही कामना, लेकर माता – पिता और गुरु… Read More

कविता : तस्वीर

मेरे जीवन में  जब तक माँ मेरे साथ थी  मैं कभी भी उस तरह से उसे नहीं देख सका जिस तरह से मुझे जन्म देकर उसने देखा था ना ही कभी सुन सका मैं उसकी तरह क्योंकि वह हृदय से… Read More

virangna patni eak sheed ki

विरांगना – पत्नी एक शहीद की

सेज सुहाग पर, सुहाग के लाल जोड़े में, मेंहंदी तेरे नाम की रचाये, शर्म की घुंघट ओढ़े, बैठी थी तेरे इंतजार में, तुम जो धीरे से आये, इस चाँद से मुखड़े को, पास बैठ लेकर हांथों में, मुसकुराये, घुंघट उठाये,… Read More