poem khet khalihan

कविता : खेत और खलिहान सजाया

जिसने अथक परिश्रम करके खेत और खलिहान सजाया जिसने खून-पसीना देकर मिट्टी में सोना उपजाया खुद भूखे रहकर भी जिसने दुनिया को भर पेट खिलाया आज अन्नदाता आखिर क्यों खेत छोड़कर सड़क पे आया सैंतालिस से वर्तमान तक आईं-गईं, कई… Read More

कविता : अपना ही राग अलापो

लिखे वो लेखक पढ़े वो पाठक। जो पढ़े मंच से वो होता है कवि। जो सुनता वो श्रोता होता है। यही व्यवस्था है हमारे भारत की। लिखने वाला कुछ भी लिख देता है। पढ़ने वाला कुछ भी पढ़ लेता है।… Read More

Varnmala in Hindi

कविता : हिंदी के स्वर

अ से फल अमरूद का मीठा आ से मीठा आम इ से खट्टी इमली बिकती ई से ईख के दाम उ से उल्लू, वह पक्षी जो रात-रात भर जागे ऊ ऊन का देख के स्वैटर सर्दी उल्टा भागे ऋ से… Read More

Ravindranath Tagore

गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्य तिथि पर सादर नमन के साथ मनहरण छंद

(01) आन बान शान वाला, नोबेल वे साहित्य का, पाने वाले एशिया के, प्रथम सपूत थे। नाम था रवीन्द्रनाथ, गुरुदेव लोग जिन्हें, कहा करते थे सभी, भारती के पूत थे।। भारतीय सांस्कृतिक चेतना जगाने वाले, रखते थे ज्ञान की वे… Read More

poem ab to samjh ja

कविता : अब तो समझ जा

बहुत छेड़ा करते थे, प्रकृति के संसाधनो को। ये सब देखते रहे, श्रृष्टि के वो निर्माता। और हंसते रहे भाग्यविधाता, जिसने लिखा है भाग्य तेरा। अब तो तू संभल जा, और समय को समझ जा। क्योंकि समय की मार ने,… Read More

poem mere anubhaw

कविता : अनुभव से

मिला मुझको बहुत कुछ अपनी मेहनत लगन से। मेरे अनुभवों को कोई न क्या कभी छोड़ा पायेगा! तपा हूँ आग की भट्टी में तो कुछ बनकर ही निकला हूँ। और फिर से जिंदगी में  कुछ नया निश्चित करूँगा।। भले ही… Read More

ayodhya ram mandir

कविता : श्रीराम मंदिर निर्णय

बिगाड़ने से भी नही बिगड़े अयोध्या के आवाम जो लिख चुके है सदियों से सदभाव का पैग़ाम कोशिश किया सभी ने मिलकर मुल्क़ के शैतान बन्द कर दिया अवध ने सियासत की सब दुकान , अब अमन का कारवां बहेगा… Read More

poem man me ram biraje

कविता : मन में राम विराजे

मन में राम विराजे, हर घर में श्री राम चरण हो, दुःख हरे पल भर में, हर घर में रामायण पाठ हो!! पल में कटे संकट सारे, ऐसा प्रभु का नाम हो, कोई दुःख पास ना आये, जब राम नाम… Read More

ram temple ayodhya

कविता : जय श्री राम

देखो रामलला आये हैं, साथ में खुशियाँ लाये हैं।। 500 साल बाद अयोध्या में, सबके दुःख हरने आये हैं।। हे प्रभु करदो कृपा इतनी, दुःख,दर्द हर लो जल्दी।। केरोना भयंकर बीमारी को, कर दो इस देश से छुट्टी।। मेरे जीवन… Read More

poem ye hawa le chal kahi

कविता : ऐ हवा ले चल कहि

ऐ हवा ले चल कहि, इस शोर से दूर कहि!! कड़वा है हर लहज़ा यहाँ, जहां हो मिठास कहि!! है यहाँ आपसी मतभेद, ना हो जहाँ बैर कहि!! ऐ हवा ले चल कहि, इस शोर से दूर कहि!! हर जगह… Read More