प्रेम के कुछ गंदे सने शब्दों को आंखों की बाल्टी में कुछ गर्म आँसुओं के साथ जब पूर्णतः भिगोकर दिल के पत्थर पर फ़ीचता हूँ और वह भी जब तक कि उसके चिथड़े न हो जायँ तब तक मुझे बेचैनी… Read More
प्रेम के कुछ गंदे सने शब्दों को आंखों की बाल्टी में कुछ गर्म आँसुओं के साथ जब पूर्णतः भिगोकर दिल के पत्थर पर फ़ीचता हूँ और वह भी जब तक कि उसके चिथड़े न हो जायँ तब तक मुझे बेचैनी… Read More
कर्मशाला से विदाई का अब समय आ गया। तो दिल की धड़कने बहुत तेजी हो गई। और अपनो के प्यार के लिए, दिल बहुत तड़पने लगा। साथ जिनके काम किया, अब उनसे विदा ले रहा हूँ। और अपनी नई जिंदगी… Read More
छोटी बड़ी बहिनों का, हमे मिलता रहे प्यार। क्योकि मेरी बहिना ही, है मेरी मातपिता यार। जो मांगा वो लेकर दिया, अपने आपको सीमित किया। पर मांग मेरी पूरी किया, और मेरे को खुश करती रही। मेरी गलतियों को छुपाती… Read More
भाई बहिन का बंधन, जिसको कहते रक्षाबंधन। स्नेह प्यार से बंधा रहे, भाई बहिन का रिश्ता। इसलिए तो आता है, हर साल ये रक्षा बंधन। बहिना सबसे मिलती है, मायके में इसदिन आकर। दिल सबके खिल उठाते है, बहिना से… Read More
भाई का लाढ है राखी, बहन का प्यार है राखी!! लड़ना और फिर झकड़ना, बहन को खुश रखना है राखी!! कहि भाई का बलिदान है, तो बहन का गौरव है राखी!! बॉर्डर पर जो तैनात है सिपाही, उस बहन का… Read More
याद है आज भी बचपन का अफसाना वो बाजार मे सजा गुड़ियों का तराना।। चाहती थी मैं वो आंख मिचती गुड़िया पर पापा की जेब मे न थी पैसे की पुड़िया।। मन मे ख्वाहिश दबा के भी थी मुस्कुराई पापा… Read More
हर सावन में आती राखी। बहिना से मिलवाती राखी। बहिन-भाई का अनोखा रिश्ता। बना रहे ये बंधन हमेशा।। जो भूले से भी ना भूले। बचपन की वो सब यादे। बहिन-भाई का अटूट प्रेम। सब कुछ याद दिलाती राखी।। भाई बहिन… Read More
मैं स्त्री हूँ …. हाँ, मैं वही स्त्री हूँ, जिसे इस पुरूष प्रधान समाज ने, हमेशा हीं प्रताड़ित किया है। हाँ, वही समाज जिसने, मेरे प्रति अत्याचार किया, व्यभिचार किया और, मेरी इस दयनीय स्थिति का पूर्णत: ज़िम्मेदार भी है।… Read More
न हंसता है, न रोता है वो रातों को न सोता है जो जीता है अपने देश के लिये ऐसा तो केवल सैनिक ही होता है। वो धीर है, गम्भीर है निडर है और वीर है जो दुश्मन का कर… Read More
न जाने कितनों को, अपने ही लूट लिया। साथ चलकर अपनों का, गला इन्होंने घोट दिया। ऊपर से अपने बने रहे, और हमदर्दी दिखाते रहे। मिला जैसे ही मौका तो, खंजर पीठ में भौक दिया।। ये दुनियाँ बहुत जालिम है,… Read More