poem prem ke kpade aur shabd

कविता : प्रेम के कपड़े और शब्द

प्रेम के कुछ गंदे सने शब्दों को आंखों की बाल्टी में कुछ गर्म आँसुओं के साथ जब पूर्णतः भिगोकर दिल के पत्थर पर फ़ीचता हूँ और वह भी जब तक कि उसके चिथड़े न हो जायँ तब तक मुझे बेचैनी… Read More

poem last day in office

कविता : कार्यशाला से सेवानिवृत्ति

कर्मशाला से विदाई का अब समय आ गया। तो दिल की धड़कने बहुत तेजी हो गई। और अपनो के प्यार के लिए, दिल बहुत तड़पने लगा। साथ जिनके काम किया, अब उनसे विदा ले रहा हूँ। और अपनी नई जिंदगी… Read More

poem rakhi festival

कविता : बहिन भाई का संबंध

छोटी बड़ी बहिनों का, हमे मिलता रहे प्यार। क्योकि मेरी बहिना ही, है मेरी मातपिता यार। जो मांगा वो लेकर दिया, अपने आपको सीमित किया। पर मांग मेरी पूरी किया, और मेरे को खुश करती रही। मेरी गलतियों को छुपाती… Read More

poem raksha bandhan

कविता : भाई बहिन का बंधन

भाई बहिन का बंधन, जिसको कहते रक्षाबंधन। स्नेह प्यार से बंधा रहे, भाई बहिन का रिश्ता। इसलिए तो आता है, हर साल ये रक्षा बंधन। बहिना सबसे मिलती है, मायके में इसदिन आकर। दिल सबके खिल उठाते है, बहिना से… Read More

poem rakhi

कविता : बहन का प्यार है राखी

भाई का लाढ है राखी, बहन का प्यार है राखी!! लड़ना और फिर झकड़ना, बहन को खुश रखना है राखी!! कहि भाई का बलिदान है, तो बहन का गौरव है राखी!! बॉर्डर पर जो तैनात है सिपाही, उस बहन का… Read More

poem gudiya

कविता : वो मेरी गुड़िया

याद है आज भी बचपन का अफसाना वो बाजार मे सजा गुड़ियों का तराना।। चाहती थी मैं वो आंख मिचती गुड़िया पर पापा की जेब मे न थी पैसे की पुड़िया।। मन मे ख्वाहिश दबा के भी थी मुस्कुराई पापा… Read More

Happy Raksha Bandhan

कविता : रक्षाबंधन

हर सावन में आती राखी। बहिना से मिलवाती राखी। बहिन-भाई का अनोखा रिश्ता। बना रहे ये बंधन हमेशा।। जो भूले से भी ना भूले। बचपन की वो सब यादे। बहिन-भाई का अटूट प्रेम। सब कुछ याद दिलाती राखी।। भाई बहिन… Read More

poem sore woman mind

कविता : व्यथा स्त्री मन की

मैं स्त्री हूँ …. हाँ, मैं वही स्त्री हूँ, जिसे इस पुरूष प्रधान समाज ने, हमेशा हीं प्रताड़ित किया है। हाँ, वही समाज जिसने, मेरे प्रति अत्याचार किया, व्यभिचार किया और, मेरी इस दयनीय स्थिति का पूर्णत: ज़िम्मेदार भी है।… Read More

poem esa to sanik he hota hai

कविता : ऐसा तो सैनिक ही होता है

न हंसता है, न रोता है वो रातों को न सोता है जो जीता है अपने देश के लिये ऐसा तो केवल सैनिक ही होता है। वो धीर है, गम्भीर है निडर है और वीर है जो दुश्मन का कर… Read More

poem apno se dar

कविता : अपनों से डर

न जाने कितनों को, अपने ही लूट लिया। साथ चलकर अपनों का, गला इन्होंने घोट दिया। ऊपर से अपने बने रहे, और हमदर्दी दिखाते रहे। मिला जैसे ही मौका तो, खंजर पीठ में भौक दिया।। ये दुनियाँ बहुत जालिम है,… Read More