एक बरस में मौसम चार, यह फिल्मी गाना बहुत लोकप्रिय है। जहाँ पाँचवे मौसम के रुप में ‘प्यार” के मौसम की बात होती है।जब हम इस पाँचवे मौसम की तह तक जाते है तो इस भाव को व्यक्त करने के… Read More
एक बरस में मौसम चार, यह फिल्मी गाना बहुत लोकप्रिय है। जहाँ पाँचवे मौसम के रुप में ‘प्यार” के मौसम की बात होती है।जब हम इस पाँचवे मौसम की तह तक जाते है तो इस भाव को व्यक्त करने के… Read More
मज़बूर हूँ मैं। मगर ये मत समझना, कि कमज़ोर हूँ। मज़बूत हूँ मैं, साथ ही ग़रीब हूँ। मगर लाचार नहीं।। तेरे शोषण का सुबूत हूँ मैं, तेरी ही पहचान हूँ मैं। फिर भी अपनों के लिए कार्य कर रही हूँ।… Read More
बसंत की बेला आई मन में महक जगाई अब तू भी जी ले कुछ पल को मन में यह फूल खिलाई बसंत की बेला आई।। मन की बागियों में अब तू हंसियो के फूल खिला दें यादों की सोंधी सी… Read More
नदियाँ खुद अपनी चाल से रास्ते बना लेती है। बड़े-बड़े पहाड़ों को भी चीर कर आगे निकल जाती है। क्योंकि उन्हें अपने आप पर विश्वास होता है। इसलिए उन्हें आदर से पूजा जाता है।। इरादे हो अगर नेक तो मंजिले… Read More
सोच बदलो गाँव बदलो अब चलो गाँव में। तभी हम गाँवो को खुशहाल बना पाएंगे। और नया हिंदुस्तान हम मिलकर बनाएंगे। और गाँवो का इतिहास एक बार फिर से दोहरायेंगे। गाँवो की मिट्टी का कोई जवाब नहीं है। पैरो में… Read More
आओ मिलकर हम सब सुंदर भारत का निर्माण करें…. किसी बच्चे का दामन न छूटे अपने बचपन से रोंदे न कोई उसके सपनों को बाल श्रम के घन से कोई छीने न इनसे इनका भोलापन फिर न कोई छोटू मज़बूर… Read More
हम जात पात में पड़े रहेंगे। और देश को बर्बाद करेंगे। दूसरे देश प्रगति को चुनेंगे। और विश्व में पहचान बनाएंगे।। गये थे जब अंग्रेज देश से तो जाति का बीज वो गये थे। जिससे आपसी भाई चारा देश में… Read More
पहले चिट्ठी आती थी पढ़ते थे हफ्तों तक फोन पर अब तो बाते हुई सीमित जैसे छोटे हो दिन।। वो भी क्या दिन थे, जब मिल घंटो बतियाते थे अब चलते – चलते मुलाकाते हुई।। सावन के झूले तीज त्यौहार… Read More
राम को जपो श्याम को जपो जपो ब्रम्हा विष्णु महेश को। पर मत छीनो लोगों से तुम उनके अधिकारो। राष्ट्र चरित्र का तुम सब कब करोंगे निर्माण? बहुत हुआ खेल अब जाति धर्म का देश में। कुछ तो अब शरम… Read More
मकर संक्रांति आई है एक नई क्रांति लाई है निकलेंगे घरों से हम तोड़ बंधनों को सब जकड़ें हैं जिसमें सर्दी से बर्फ़ शीत की गर्दी से हटा तन से रजाई है मकर संक्रांति आई है एक नई क्रांति लाई… Read More