पुस्तक समीक्षा : चौकीदारी पीठ में दलित चिंतन के सरोकार

हिंदी साहित्य में हरेक विधा का अपना प्रभाव होता है। लेखक या कवि अपना संदेश लोगों तक साहित्य की विधा के माध्यम से पहुंचा देते हैं। हर विधा का अपना ढांचा और कार्यशैली होती है। कविता में कवि कम शब्दों… Read More

tute pankhon se parwaz tak

पुस्तक समीक्षा : ‘टूटे पंखों से परवाज़ तक’

हिंदी साहित्य में विमर्शों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे समाज की दबी हुई आवाज आम जनता तक दस्तक दे रही है। इन विमर्शों में आदिवासी और दलित की आवाज का शोर दूर तक लोगों को प्रभावित कर रहा है। दलित… Read More

‘तीरगी में रौशनी’ ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण

दिनांक 15/04/2025 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के हिन्दी विभाग के रामचंद्र शुक्ल सभागार में विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप के संरक्षण में डॉ. सुनील कुमार शर्मा के ग़ज़ल संग्रह ‘तीरगी में रौशनी’ पुस्तक का लोकार्पण संपन्न हुआ। जिसमें देश भर… Read More

ram katha

शोध लेख : भारतीय कला और साहित्य में रामकथा का प्रभाव

शोध सार:-           रामकथा भारतीय संस्कृति, साहित्य और कलाओं में गहरे तक व्याप्त एक महत्त्वपूर्ण आख्यान है। यह कथा भारतीय जीवन दर्शन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं का आधार है। इस शोध में रामकथा के भारतीय कला और साहित्य पर… Read More

jis din

कविता : जिस दिन

जिस दिन तुम्हारी दृष्टि में पथ-गंतव्य अभिन्न प्रतीत होने लगे समझ लेना, तुमने उपलब्धि की उस प्रमाणित रेखा को मिटा दिया है। जिस दिन प्रसन्नता और मुस्कुराहट में फर्क करना कठिन हो जाए समझ लेना तुमने अपने मन को स्वयं… Read More

kya hai jaruri

कविता : क्या है जरूरी

जो बीत गया, क्या वो वापस नहीं आ सकता? जो बदल गया, क्या वो दुबारा नहीं बदल सकता? जो छूट गया, क्या वो दुबारा नहीं मिल सकता? जो रुक गया, क्या वो दुबारा नहीं शुरु हो सकता? हर समय बदलना,… Read More

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आज उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी के राजर्षि सेमिनार हॉल में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, इंडियन बैंक, वाराणसी तथा राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, यू.पी.कॉलेज, वाराणसी के संयुक्त तत्त्वावधान में आशुभाषण प्रतियोगिता तथा साइबर सुरक्षा जागरूकता… Read More

mushkil hai

कविता : मुश्किल है

मुझे तोड़ना बहुत मुश्किल है! छोड़ दो चाहे मुझे मुश्किल हालातों में चाहे तोड़ दो आत्मविश्वास मेरा हर बार मुझे ख़ुद से संभलना आता है! गिरा लो चाहें मनोबल जितना गिरकर मुझे ख़ुद से उठना आता है दे लो चाहें… Read More

पतहर पत्रिका के नये अंक का हुआ लोकार्पण

गुरुवार को साहित्यिक पत्रिका पतहर के नवीनतम अंक का लोकार्पण नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया में किया गया। सभा के उपाध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि सरोज पांडेय, मंत्री अनिल कुमार त्रिपाठी सहित उपस्थित साहित्यकारों द्वारा जनपद से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका के… Read More

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हिंदी कविता : धूमिल और उनके बाद

जनकवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की 50वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज हिंदी विभाग, उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी तथा प्रगतिशील लेखक संघ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी के राजर्षि सेमिनार हॉल में पहले सत्र में ‘हिंदी कविता :… Read More