कहा से हम चले थे कहा हम आ पहुंचे है। बुझाकर नफरतो के दीप मोहब्बत जगा दिये है। दिलो में दीप मोहब्बत के हमने जला दिये है। इसलिए तो हम और आप करीब जो आ गये है।। अमन और चैन… Read More
कहा से हम चले थे कहा हम आ पहुंचे है। बुझाकर नफरतो के दीप मोहब्बत जगा दिये है। दिलो में दीप मोहब्बत के हमने जला दिये है। इसलिए तो हम और आप करीब जो आ गये है।। अमन और चैन… Read More
प्यार में देखो हम कैसे फिसल जो रहे। आपके प्यार में हम क्यों बंधने लगे। किस तरह से हम अब सजने सभार ने लगे। दो जिस्म को एक जान क्यों कहने लगे।। प्यार में देखो हम कैसे फिसल जो रहे।।… Read More
बहुत देर की खामोशी को तोड़ते हुए नील ने आख़िर बोलना शुरू किया “तुम खुश हो वहाँ?” नंदिनी ने बड़ी ही सहजता से कहा “हम्म, अनुराग मेरा बहुत ख्याल रखते हैं।” करीब 10 साल बाद अचानक एक रेस्टोरेंट में मिलना… Read More
जीवन है तो लड़ते रहना … थक कर बैठ न जाना तुम,कोशिश करते रहना दुनियां की मैराथन में तुमको धावक बनना है ज़मी ये काफी न होगा आसमां पर चलना है अभी तो ये शुरुआत, जंग तुम्हे है और लड़ना… Read More
दर्द सहने की अब आदत सी हो गई है। प्यार किया है तो इसे सहना पड़ेगा। कांटो पर चलकर मोहब्बत को पाना पड़ेगा। बीत जायेंगे दुखभरे दिन कांटो पर चलचल कर। और मोहब्बत करने वाली को समाने आना पड़ेगा।। जब… Read More
कहानी शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमता अनैतिकता अराजक व्यवस्था पर प्रहार करती है और सन्देश देती है कि किसी भी देश राष्ट्र समाज देश में शिक्षा कि बुनियाद यादि निष्पक्ष मजबूत ईमानदार सामाजिक कल्याणकारी व्यवस्था नहीं है तो राष्ट्रीय समाज… Read More
कहानीकार ने भारतीय समाज में बेटियो कि उपेक्षा भ्रूण हत्या बेटी बेटों में असमानता भ्रूण हत्या और उनके साथ हो रही ना इंसाफी को बड़े ही सजीव तरीके से इस कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया है ।साथ ही साथ… Read More
भारत के माध्यम बर्गीय परिवार कि है जिसमे पति के न रहने के बाद उसकी अमानत उसकी संतानो कि परिवरिश और गिरते नैतिकता के समाज में स्वयं और पति के धरोहरों रक्षा कर पाना विधवा के लिये चुनैति और जीवन… Read More
कलयुग भी सतयुग जैसा लग रहा विद्यासागर जी के कामों से। कितने जीवों के बच रहे प्राण उनकी गौ शालाओं से।। जीव हत्या करने वाले अब स्वयं आ रहे उनकी शरण में। लेकर आजीवन अहिंसा का व्रत स्वयं करेंगे उनकी… Read More
हम और हमारे जीवन का हर पल किसी गणित से कम नहीं है, जीवन में जोड़ घटाव भी यहाँ कम कहाँ है, गुणा भाग का खेल तो चलता ही रहता है। कभी जुड़ना तो कभी घटना शेष भी रहता सदा… Read More