किसी किताबख़ाने में जाओगे आप कभी, तो हर क़िताब को अच्छे से झांककर देख लेना, हा, सिर्फ मेरी ही नही होगी हर किताब मौजूद किताबो में, पर बिल्कुल किसीने मेरी तरह मोड़ के रखे होंगे किताबो के पन्ने, जैसे कोई… Read More
किसी किताबख़ाने में जाओगे आप कभी, तो हर क़िताब को अच्छे से झांककर देख लेना, हा, सिर्फ मेरी ही नही होगी हर किताब मौजूद किताबो में, पर बिल्कुल किसीने मेरी तरह मोड़ के रखे होंगे किताबो के पन्ने, जैसे कोई… Read More
कारगिल युध्द के बाद भारत के अनमोल रत्न सचिन तेंदुलकर ने कहा था कि… “जब देश की सीमा पर हमारे जवान पाकिस्तान से युद्ध लड़ रहे हों तो, ऐसे समय में पाकिस्तान से क्रिकेट खेलने का कोई मतलब नहीं है”।… Read More
धरती से उड़कर आदित्य, उस आदित्य ओर चला। बदल-बदल कर वह कक्षाएँ, एक बार फिर वो सम्भला। इसरो की आशाएँ उस पर। भारत-विश्व स्वाभिमान है। *अजस्र* भास्कर देख नजारा, विस्मय स्वर उससे निकला। कदम-कदम आगे ही बढ़ता, ‘आदित्य’, ‘आदित्य’ का… Read More
हर एक अंत से ही नई शुरुआत होती है। भूलाकर गिले शिकवो को नई शुरुआत करते हैं। लोग तो आते हैं जाते हैं… पर उनके काम याद आते है। शायद इसकी को दुनियांदारी दुनियां वाले कहते है।। दिल व्याकुल हो… Read More
गली-गली में घूमते… शराफ़त का मुखौटा लगाए कभी सहायक बनकर कभी खास बनकर। उठाते मजबूरी का फायदा नौकरी, धन और प्रेम का झांसा देकर। नजरों में कच्चा खा जाने की प्यास मन में हवस का अरमान लिए करते हैं रतिभरा… Read More
चाहत तो रखते है धन की सभी । पर उपयोग उस धन वो करते नहीं। धन आने पर बंद, तिजोरी में करते है। पर लक्ष्मीजी तो चंचल होती है। तो लोग उसे कैद कैसे कर सकते हो।। धन और विद्या… Read More
भारत देश एक बहुभाषायी और बहुसांस्कृतिक देश है। यहाँ तकरीबन 19500 मातृभाषाएँ बोली जाती हैं। लेकिन भारत की जनगणना 2011 के आँकड़ों के अनुसार 122 भाषाएँ ही ऐसी हैं जो दस हजार से ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती हैं। देश… Read More
अंदाजा लगाता हुआ आया था वह अपने ही घर में, ऐसा लगता था जैसे आखिरी बचा हुआ बाशिंदा हो शहर में, घर का दरवाजा खोला था उसने बहुत आहिस्ता, किसी नजर से पड़े न इस वक्त उसका वास्ता, कोई बाहर… Read More
अपनी भक्ति करने का हे माँ! तुम अधिकार दे दो। मेरी भक्ति का मुझको हे माँ! तुम प्रसाद दे दो। मुझे धन दौलत नहीं हे माँ! बस दर्शन दे दो। और अपना हाथ हे माँ! मेरे सिर पर रख दो।।… Read More
पेड़ के ऊपर बैठकर तुम , पेड़ की डाल को काट रहे । बुद्धिमत्ता कहकर इसको भी , पांव कुल्हाड़ी मार रहे । ‘ अजस्र ‘ इतिहास के जख्मों को भरना , काम समय का होगा भविष्य । जख्मों को… Read More