करते जो खुद पर विश्वास रचते वे ही नया इतिहास… बिना फल की इच्छा करे कर्मों पर हो अटल विश्वास धरती ही नहीं अंबर छू लेने का जिनके मन में बुलंद अहसास रचते वे ही नया इतिहास… छोड़ उम्मीद दूसरों… Read More
करते जो खुद पर विश्वास रचते वे ही नया इतिहास… बिना फल की इच्छा करे कर्मों पर हो अटल विश्वास धरती ही नहीं अंबर छू लेने का जिनके मन में बुलंद अहसास रचते वे ही नया इतिहास… छोड़ उम्मीद दूसरों… Read More
कवि क़भी मरता नहीं हैं जिंदा रहता हैं हमेशा हरदम हरपल हर समय, तब तक जब तक यह सृष्टि रहतीं हैं, और रहता हैं बुद्धि विवेक समझ का राज्य प्रेम सौहार्द्र का वातावरण, तब तक रहता हैं जिंदा कवि लोगों… Read More
जिस धरती पर लेकर के जनम ईश्वर भी हैं हर्षित होते जहाँ अपनी लीला करने को हैं देवता आकर्षित होते जहाँ नदियों का पावन संगम जहाँ सागर गाते हैं सरगम जहाँ पर प्रकृति पूजी जाती जहाँ पत्थर में भी मिलें… Read More
खुद पर ही खुद के फैसले,अब भारी हो गए कल तलक था सब कुछ,अब भिखारी हो गए बदल गया है दुनिया का चलन कितना यारों, कभी थे जो शिकार खुद अब शिकारी हो गए क्या याद करना अब उन गुज़रे… Read More
कभी गमों के साये में जिये तो कभी खुशी के महौल में। जिंदगी को जीने के कई नये-नये तरीके मिले। बदलते मौसम के साथ हम भी जीने लगे। और इरादे भी समयानुसार हम भी बदलने लगे।। भले ही ये सब… Read More
वो मोरों का नर्तन कहाँ गया ! फूलों का उपवन कहाँ गया ! अरे कहाँ गए सब मेरे अपने , हम सबका आँगन कहाँ गया ! सबका ही सुख है अपना सुख, वो जीवन का दर्शन कहाँ गया ! रिश्तों… Read More
दीप जलाओ तुम सब। करो अंधकार को दूर। रोशनी कर लो मन में। इस दीपाली पर।। घर का कचड़ा साफ करो। मन को करो तुम शुध्द। जग मग कर दो गली मौहल्ले और अपना घर। दिलो में खुशीयाँ भर दो,… Read More
करो प्रकाशित घर आँगन दुनिया से तम दूर भगाओ पहले सब को खुशियां बांटो फिर अपने घर दीप जलाओ अपने मन को निर्मल कर लो यारा लोभ मोह सब दूर करो बस करो मदद एक दूजे की दिल से दिल… Read More
एक दिन देखा मैंने, सहसा ! एक काले से साए को बाहर आते, आज के आदमी सा, कुछ सहमा, कुछ सकुचाया, उस साए ने, बाहर आ प्रश्न किया…… क्या तुम अब तक ज़िन्दा हो ? …कैसे ? मुझे लगा मैं… Read More