साहब ने एसी रूम में बैठ नो आब्जेक्शन लिख दिया चंद मिनटों में ही लकड़हारों ने मेरा वजूद मिटा दिया। दशकों तक हवा-पानी पाकर बड़ी हुई थी टहनियां। मेरे बड़े पत्ते तपती धूप में राहगीरों को देते थे छाया। बारिश… Read More
साहब ने एसी रूम में बैठ नो आब्जेक्शन लिख दिया चंद मिनटों में ही लकड़हारों ने मेरा वजूद मिटा दिया। दशकों तक हवा-पानी पाकर बड़ी हुई थी टहनियां। मेरे बड़े पत्ते तपती धूप में राहगीरों को देते थे छाया। बारिश… Read More
आओ आओ पेड़ लगाओ प्रदूषण को देश से भगाओ पेड़ इन्सान के जीवन की कहानी है ये बात ऋषि-मुनि-वैज्ञानिक ने मानी है पेड़ है तो ये जहाँ है पेड़ नहीं तो ये जहाँ नहीं चींटी हो या हाथी पेड़ सबका… Read More
बासु चटर्जी हिंदी और बांग्ला सिनेगा के ऐसे नाम हैं जिनकी फिल्में वास्तव में मध्यवर्गीय जीवन की छोटी – छोटी विसंगतियों को स्वर देती हैं। आम जीवन में पनपे प्रेम की सामाजिक जटिलता को सुलझाती हुई उनकी फिल्में समांतर सिनेमा… Read More
भारत पाकिस्तान का नाम एक साथ आते ही हर हिंदुस्तानी या पाकिस्तानी के कान ही खड़े नहीं होते बल्कि दोनों और के दिलों में एक चिंगारी भड़क उठती है जनाब। लेकिन इन दोनों दुश्मन मुल्कों के बीच बहुत बार ऐसे… Read More
हिंदी सिनेमा के दर्शकों का प्रसिद्ध गायक एसपी बालासुब्रमण्यम से परिचय तब हुआ जब कमल हसन की हिंदी में पहली फिल्म एक दूजे के लिए से हुआ था। उसका गीत हम बने तुम बने एक दूजे के लिए जबर्दस्त हिट… Read More
तन-लोहा मन गलता है, सड़कों पर मजदूर पलता है। मीलों का सफर हैं नंगे पाँव, लौट चलें आ अपने गाँव बहुत हो गया धूप-छांव लौट चलें आ अपने गाँव! छोड़ अरे यह तेरा-तेरी शहरों की यह हेरा-फेरी सड़क किनारे मेरी… Read More
घने-गहरे जंगल से गुजरती है पगडंडी कुछ बिखरे पत्तों की सरसराहट पहिये की गति भारी है तरुशिखा पर सुनहरी-आभा-सी डोलती घने जंगलों की छिद्रित परछाइयाॅ-सी मुसकुराकर बोलती रंग-बिरंगे पंखों की फड़फड़ाहट कुछ घरौंदों से उभरती चहचहाहट मृदंग-सी कलकल करती चंचल-अल्हड़… Read More