ऐ उम्र! तुम इतनी निश्चित जितनी मृत्यु अनिश्चित मैं रहा धरा पर विभ्रांत समर-सा पर कर न सका यह सुनिश्चित। मेरा अंश बहती गंगा-सा मिल न सका सु-परिचित जल-जल कर मैं राख बन गई जब तीव्र अग्नि हो प्रज्वलित नेत्र-भ्रुकुटी… Read More
ऐ उम्र! तुम इतनी निश्चित जितनी मृत्यु अनिश्चित मैं रहा धरा पर विभ्रांत समर-सा पर कर न सका यह सुनिश्चित। मेरा अंश बहती गंगा-सा मिल न सका सु-परिचित जल-जल कर मैं राख बन गई जब तीव्र अग्नि हो प्रज्वलित नेत्र-भ्रुकुटी… Read More
शीर्षक : प्रकाश – एक द्युति (हाइकु क्षितिज) लेखक : मनीष कुमार श्रीवास्तव प्रकाशक : द इंडियन वर्डस्मिथ, पंचकुला मूल्य : 250/- साहित्य के क्षेत्र में ‘हाइकु’ एक ऐसी काव्य विधा है, जिसमें कलमकार बहुत कम शब्दों में बहुत बड़ी… Read More
ज़रा सी दोस्ती कर ले.., ज़रा सा साथ निभाये। थोडा तो साथ दे मेरा …, फिर चाहे अजनबी बन जा। मिलें किसी मोड़ पर यदि, तो उस वक्त पहचान लेना। और दोस्ती को उस वक्त, तुम दिल से निभा देना।।… Read More
शाम के सात बज रहे थे। पटना के ईकलॉजिकल पार्क में अविनाश अपनी गर्लफ़्रेंड अनामिका की गोद में सिर रखकर लेटा हुआ था और अनामिका उसके घुंघराले बालों में अपनी उँगलियाँ फेर रही थी। तभी अविनाश के मोबाइल फोन का… Read More
माता सरस्वती की महिमा अपरम्पार रे, तु तो श्वेत हंस पे करती सदा सवार रे, जिस पर तेरी कृपा दृष्टि बन जाती है, मूर्ख से मूर्ख भी बन जाता होशियार रे, कालिदास और तुलसी हुए कैसे विद्वान, तेरी कृपा दृष्टि… Read More
पदयात्रा द्वारा मज़दूरों का पलायन गम्भीर विषय है,परंतु चिंतन का भी…कहावत याद आई, कान में तेल डालना अथवा सुनकर भी अनसुना कर देना। वर्तमान में कुछ ऐसा ही हो रहा है,बहुसंख्यक निर्धन प्रवासी मज़दूरों द्वारा हज़ारों मील पदयात्रा करनी पड़… Read More
Title: The Wail Of The Woods Author: Zakir Malik Genre: English Poetry Publisher: The Indian Wordsmith Bound: Paperback Price: Rupees 300/- “The Wail of The Woods” is the collection of poems encompassing more than hundred poems that highly bridge the… Read More