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जन्मदिन विशेष : सुनील दत्त

सुनील दत्त का जीवन एक मिसाल है जिसमें बंटवारे का दंश झेलने वाले परिवार का युवक संघर्ष के विभिन्न पड़ावों से गुजरता हुआ बस कंडक्टर की मामूली नौकरी शुरू कर देश का मंत्री के पद तक पहुंचता है। आज सुनील… Read More

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ग़ज़ल : इक दिन ये माटी ही तेरी कहानी बनेगी

इक दिन ये माटी ही, तेरी कहानी बनेगी यारा तेरी फितरत ही, तेरी निशानी बनेगी भूल जायेगी तेरी शक्ल ओ सूरत ये दुनिया, बस तेरी करनी ही, सब की जुबानी बनेगी गर निकाल दे अंदर से ये हवस का जिन,… Read More

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ग़ज़ल : हम जुबां अपनी क्या चलाने लग गए

हम जुबां अपनी क्या चलाने लग गए ! लोग हक़ीक़त अपनी छुपाने लग गए ! सच सुनने की न बची हैं हिम्मत उनमें, अब राह चलते वो आँखें दिखाने लग गए ! क्या होगा वतन का कोई समझाए ज़रा, जब… Read More

ग़ज़ल : धोखे से पाई सफलता

धोखे से पाई सफलता क्या सच में सफलता है? चांद बुलंदी पे है फिर भी दाग़ तो दिखता है रोज़ उसे ही लिखा मैंने कश्मकशीं देखों. इश्क़ मेरा वो किसी ओ को ही समझता हैं इश्क़ को मैंने जवानी का… Read More

गीत : मोहब्बत या स्वार्थ

मिले जितने भी अब तक, मोहब्बत करने के लिए। मोहब्बत कम थी उन्हें, नजर बस पैसे पर थी। आज कल यही माहौल, जमाने में चल रहा। इसलिए अब मोहब्बत का, अहसास दिलो में नहीं बचा।। समझ पाये ही नही, किसी… Read More

कहानी : ख़ैराती जयचंद

पाठक टोली और शर्मा टोली में पिछले महीने वर्चस्व को लेकर जमकर मारपीट हो गई थी। मारपीट की घटना में पाठक टोली के दो और शर्मा टोली के आठ लोग घायल हुए थे। शर्मा टोली के ज़्यादा लोग घायल हुए… Read More

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कविता : दरख्त का दर्द

साहब ने एसी रूम में बैठ नो आब्जेक्शन लिख दिया चंद मिनटों में ही लकड़हारों ने मेरा वजूद मिटा दिया। दशकों तक हवा-पानी पाकर बड़ी हुई थी टहनियां। मेरे बड़े पत्ते तपती धूप में राहगीरों को देते थे छाया। बारिश… Read More

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कविता : इस कुदरत से अब डरना सीख ले

शुक्र है खुदा का कि तू अपने घर में है तू उसकी सोच जो मौत की डगर मैं है ये घूमने फिरने की चाहत को भूल जा यारा हर किसी की ज़िंदगी अधर में है ये इंसानियत नहीं सिर्फ अपनी… Read More

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कविता : सबको मज़ाक लगता है

अब तो मेरा दर्द भी, सबको मज़ाक लगता है मेरा तो अब रोना भी, सबको मज़ाक लगता है कर देते हैं कभी दोस्त ज़िक्र मेरे हालात का, यारों का ये जज़्बा भी, सबको मज़ाक लगता है भला इस बेखबर दुनिया… Read More