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Happy Fathers Day

कविता : पिता शेर होता है चीता होता है

पिता होने के एहसास से,एक पिता जीता रहता है। साब ! वो पिता, पिता नहीं, शेर होता है चीता होता है॥ जो ऊँगली पकड़कर कभी चलना सिखाता है। वो बचपन में लोरी गा-गा कर कभी सुलाता है॥ हमारे झूठे नखरों… Read More

poem tum kaya pawoge

कविता : तुम क्या पाओगे?

थोड़ा सा सम्मान क्या मिला, बरसाती मेंढ़क हो गए थोड़ा सा धन क्या मिला, पागल बन बैठे थोड़ा सा ग्यान क्या मिला, बड़बोले हो गए थोड़ा सा यश क्या मिला, दुनिया पर हसने लग गए थोड़ा सा रुप क्या मिला,… Read More

poem unemployed young

कविता : बेरोजगार नवजवान

आती हुई कार से एक नवजवान टकरा गया टांग टूटी, हाथ टूटा फिर भी मुस्कराते देख कार वाला चकरा गया, अस्पताल ले जाने के लिए जैसेही उठाया नवजवान धीरे से बोला – ‘प्लीज’ मुझे अस्पताल ना ले जाईये एक्सीडेंट से… Read More

poem In this lonely journey of memories

कविता : यादों के इस तन्हा सफर में

यादों के इस तन्हा सफर में, मनोहर, एक हमसफर की तलाश है … दुख के काले अंधियारों में , सुख के पुलकित राहों में , साथ जो निभा सके उम्र भर , मनोहर, एक हमराह की तलाश है .. यादों… Read More

kavi sammelan

कविता : शिर्षक बदल

जब महीने में पांचवी बार, काव्य पाठ की नौबत आयी , शीघ्रता में मैने भी वही कविता, शिर्षक बदल फिर एक बार सुनायी | तभी, श्रोताओ के बीच से, एक आवाज जोरदार आयी – ओये कालिदास के नाती , शरम… Read More

sushant and arijit

सुशांत की आत्महत्या के बरक्स बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद और गैंगबाजी पर विमर्श

बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद कोई नई बात नहीं है। जब से फिल्में बननी शुरू हुई तो इस उद्योग में भी भाई-भतीजावाद ने धीरे-धीरे जड़े जमानी शुरू की आज तो यह वट वृक्षों का रूप ले चुका है। अब उदाहरण के रूप… Read More

poem kaya dosh hai mera

कविता : क्या दोष है मेरा

मेरे विचारों में शब्दों में कौन सा विष है जो हानि करता है दूसरों की मैं न्याय की बात करता हूं दलित की बात लिखता हूं अग्रसर हूँ लोक कल्याण की दिशा में समर्पित लम्बी यात्रा निरंतर श्रम हर दिन… Read More

poem-insan-insan-se-door-hota-ja-rha-hai

कविता : सत्य ये भी है

जन्म मरण का अब, समीकरण बदल गया। इंसान इंसान से दूर, अब होता जा रहा है। जीने की राह देखकर, मरने की बात करने लगे। फर्ज इंसानियत का भूलकर, समिति अपनो तक हो गए।। न दुआ काम आ रही है,… Read More

poem-hum-sab-chalege

कविता : हम सब चलेंगे

मर्म नहीं, खुले में कर्म की बात करेंगे विश्व चेतना के साथ अपनी शक्ति को जोड़कर हम भी कुछ रचेंगे पीड़ा, दुःख, दर्द की असमानता के पोल खोलेंगे इन गाथाओं के मूल में स्वार्थ की क्रीड़ा को हम जग जाहिर… Read More