lord radha kahana

कविता : मेरे गिरधर ,मेरे कन्हाई जी

जब भी आवाज दूं चले आना , मेरे गिरधर , मेरे कन्हाई जी । रीत प्रीत की भूल न जाना , जो भक्त-भगवान बनाई जी । तन-मन प्यासा जन्म-जन्म से, दरस को तरसे ये अखियां। बोल बोल-के छेड़े है जग… Read More

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कविता : विजयदशमी और नीलकंठ

हमारे बाबा महाबीर प्रसाद हमें अपने साथ ले जाकर विजय दशमी पर हमें बताया करते थे नीलकंठ पक्षी के दर्शन भी कराते थे, समुद्र मंथन से निकले विष का पान भोले शंकर ने किया था इसीलिए कंठ उनका नीला पड़… Read More

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कविता : राम और रावण

रावण न होते तो राम भी कहाँ होते राजकुमार राम तो होते लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम नहीं होते ! धर्म की विजय नहीं होती चक्रवर्ती सम्राट भले होते रावण राम की पहचान हुए मर्यादा की तरफ प्रस्थान हुए माता सीता… Read More

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कविता: माँ

एक अक्षर का शब्द है माँ, जिसमें समाया सारा जहाँ। जन्मदायनी बनके सबको, अस्तित्व में लाती वो। तभी तो वो माँ कहलाती, और वंश को आगे बढ़ाती। तभी वह अपने राजधर्म को, मां बनकर निभाती है।। माँ की लीला है… Read More

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कविता : माँ की आराधना

करे जो सच्चे मन से माँ की आराधना। मिले उसे ही दर्शन माता रानी का। इसलिए तो भक्त जन करते है माँ की उपासना। और पा जाते है अपने जीवन में सब कुछ।। जो माँ को दिल से याद करते… Read More

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कविता : मातारानी को पूजे

करे जो पूजा और भक्ति नवरात्रि के दिनों में। और करते है साधना माता की उपासना करके। तो मिलता है सूकून उसे अपने जीवन में। और हो जाती इच्छाएं उसकी इन दिनों में पूरी।। माता के नौ रूपों को जो… Read More

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कविता : बेटियाँ

बेटियाँ जीवन का आधार/विचार/व्यवहार खुशियों का संसार हैं। बेटियाँ/पराई हैं सुन सुनकर मुरझाई हैं फिर….भी घर/परिवार/समाज को हर्षायी हैं। बेटियाँ रिश्तों की पहचान को आयाम देती हैं। बेटियाँ पीड़ा सहकर भी मुसकराई हैं। बेटियाँ अपने होने के अहसास को अनवरत… Read More

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कविता : चट्टान

ये चट्टान हैं… आजाद -ए- दौर की, इसे चाहे तुम कह दो जो तुम्हारे जी में आए खालिस्तानी, आतंकवादी जो तुम्हे सही लगे। जोड़ दो चाहे रिश्ता उनका चीन और पाकिस्तान से फिर भी उनके हौसले बुलंद हैं, उनके रगों… Read More

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कविता : डरे कोरोना….भागे..

सौ करोड़ , हां, सौ करोड़ हम, दुनियां में हुए आगे । एक सुरक्षा कवच बना , जहां ,डरे कोरोना भागे । ताली , थाली, लॉकडाउन सब , जनता के बने हथियार । दुनियां केवल ताकती रह गई, वैक्सीन हमारी… Read More

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कविता : ऐसा भी होगा

ऐसा भी होगा शायद किसी ने सोचा भी न होगा, परिवार बिखर ही नहीं रहे मोह,ममता भी जैसे मर रहे संवेदनाएं जैसे दम तोड़ रही हैं परिवारों में भी किसी को किसी की फिक्र ही नहीं है। हर रिश्ता स्वार्थ… Read More