shadi

कविता : वो ही मनमीत चुनना तुम

स्थिरता हो मन में जिसके वो मनमीत चुनो तुम, ये चकाचौंध बहुत भटकाती है सादगी भा जाये जिसकी वो मनमीत चुनो तुम, ये दुनिया झूठे ख्वाब बहुत दिखाती है हर भावों को न तौलौ तुम समाज के दकियानूसी तराजू में,… Read More

rah

कविता : कह दो जुबान से

जो दिलमें होता है मेरे वो ही बात कहता हूँ। कहकर दिलकी बातों को सुकून बहुत मिलता है। इसलिए इस जमाने में लोग कम पसंद करते है। पर जो पसंद करते है वो बहुत अच्छे होते है।। मैं खुद को… Read More

saree

कविता : साड़ी

साड़ी सिर्फ़ परिधान नहीं स्त्री गौरव की भी शान है, साड़ी विश्व में भारतीय नारियों का मान सम्मान स्वाभिमान है। साड़ी में नारियों का सौंदर्य निखरता है शक्ल सूरत सामान्य भी तो भी साड़ी में नारी का रुप खिला लगता… Read More

zindagi(2)

कविता : जिंदगी के पल

जिंदगी कितनी हसीन और साथ ही रंगीन है। जिसमें हर रस का जो समावेश है। न चाह कर भी हम स्वयं रंगीन होते है। और हर रस को खुशी से पी लेते है।। क्यों उदासी से जीते है अपनी इस… Read More

sunya

कविता : विचारों के कारखाने में

क्या है मेरे अंदर छिपाने का बाल्य काल से ही मैं नंगा था पुस्तकों में मस्तक लगाके ढ़ूँढ़ता था- मैं अपने आपको, आंतरिक दुनिया में, कौन हूँ मैं आखिर, विचार कई थे मेरे चक्कर काटने लगे, पागल था मैं… पुस्तकालय… Read More

kanche

संस्मरण : अरे बाप रे!

अरे बाप रे, आप तो कंचे खेलते हैं…!  “क्यूं कंचे खेलना ग़लत है..? मैं तो ताश भी खेलता हूँ, तब तो ताश खेलना पाप हो जाएगा हैना..?” क्या..? ताश भी खेलते हैं, कल को जुआ भी खेलेंगे, हुंह! “तो क्या… Read More

dil(2)

दोहा : सवा-शतक

‘अजस्र’ किरपा गणेश की, सारों सगरे काम । वाणी, मात-पिता सहित, लियो राम का नाम॥ ‘अजस्र’ शक्ति उस देवी से, सीता सत का नाम । कलम-मसी करते रहें, वीणापाणि प्रणाम ॥ ‘अजस्र’ बली तुम पवन से, शंकर-सुवन प्रणाम । ‘सवा-शतक’… Read More

atit

कविता : विचारों के कारखाने में

क्या है…? मेरे अंदर छिपाने का बाल्य काल से ही मैं नंगा था, पुस्तकों में मस्तक लगाके ढ़ूँढ़ता था, मैं अपने आपको, आंतरिक दुनिया में, कौन हूँ मैं आखिर…? विचार कई थे मेरे, चक्कर काटने लगे, पागल था मैं, पुस्तकालय… Read More

zamana

कविता : जमाने को जाने

बहुत संसार को देखा और बहुत इसको सुना। जमाने की हर बातों का बहुत मंथन भी किया। मैं अपने बातों को भी इस जमनो को दे सका। और लोगों की सोच को कुछ हद तक बदल सका।। विधाता ने जमाने… Read More

krishan holi

कविता : होली अपनो के संग

आओ हम सब, मिलकर मनाएं होली। अपनों को स्नेह प्यार का, रंग लगाये हम। चारो ओर होली का रंग, और अपने संग है। तो क्यों न एकदूजे को, रंग लगाए हम। आओ मिलकर मनाये, रंगो की होली हम।। राधा का… Read More