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कविता : रंग रसिया

रंगो का त्यौहार है फूलो की बरसात है जीवन में उमंगो को जगाने रंग रसिया आया मेरे द्वार है।। ओ रंग रसिया तुम्हे कैसे रंग लगाए और कैसे खेले होली? स्नेह बेशुमार है, सात रंगों की फूआर है प्रेम मोहब्बत… Read More

dil tut gaya

कविता : टूट ना जाये

गया था आज उनके घर पूछने हाल चाल उनका। मगर थे नहीं घर पर वो इसलिए लिख आया पर्ची पर। जब आयेंगे वो घर पर तो पड़ लेंगे मेरी चिट्ठी। और मिलकर या लिखकर बताता देंगे अपना हालचाल।। मिला है… Read More

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कविता : दिल और मन

दिलमें दीपक जल उठे देख तुझे फिर से। लौटा हूँ अपने घर जो वर्षो के बाद। हाल तेरा मैं कैसे पूंछू बात करने से डरता हूँ। कहने सुनने के लिए नहीं बचा है अब कुछ।। मन की बातें मन ही… Read More

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कविता : लिख तूँ लिख

लिख तूँ लिख, सबकी सच्चाई लिख। सच लिखने में डरना मत, असली बकने में झिझकना मत। बेईमान तोय दबायेंगे, तूँ हरहाल में दबना मत। मौत से कभी डरना मत, काय मौत के बाद, फिर से जनम मिलता है। ईसें यी… Read More

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कविता : दिल मन का हाल

मेरा मन बहुत चंचल है पर दिल मेरा स्थिर है। फिर भी सपनो में वो न जाने क्यों आते है। और अपने साथ होने का मुझे एहसास कराती है। जिसे कारण ही मेरी आत्मा व्याकुल उठती है।। मोहब्बत करने की… Read More

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कविता : यथार्थ की दुनिया में

कई लोग ऐसे हैं बढ़-बढ़कर दूसरों से बोलते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपने आप से बोलते हैं अपने में दूसरों को देखना दूसरों में अपने को देखना सबसे बड़ी साधना है मनुष्य का, यथार्थ में, दुनिया में हम देखते… Read More

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गीत : प्यारा हिंदुस्तान

है प्यार बहुत देश हमारा हिन्दुतान। है संस्कृति इसकी सबसे निराली है। कितनी जाती धर्म के, लोग रहते यहाँ पर। सब को स्वत्रंता पूरी है, संविधान के अनुसार।। कितना प्यार देश है हमारा हिंदुस्तान। इसकी रक्षा करनी है आगे तुम… Read More

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कविता : जौहर-ज्वाला पद्मिनी

धधक उठी ज्वाला जौहर की राजस्थान कहानी थी । रतन सिंह मन-प्रेम पद्मिनी ,वो मेवाड़ की रानी थी। गन्धर्वराज घर की किलकारी,चम्पावती की मन ज्योति। सिंहलद्वीप की राजरागिनी , स्त्री की थी उच्चतम कोटि। सुंदरता तन में भी अनुपम ,मन… Read More

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कवित : सर्दी का मौसम और

सर्दी मौसम में प्यार मोहब्बत की आपस में बातें होती है। सर्दी मौसम में मोहब्बत निभाने कि कसमे खाई जाती है। और चलता है दौर आपस में मेल मिलाप करने का। पर होती है दिलको पीड़ा सर्दी में बिछड़ ने… Read More

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कविता : विचारों की दुनिया में

रास्ता सीधा नहीं होता धरती के अनुरूप वह,करवट लेता रहता है कभी बायें की ओर,कभी दायें की ओर सीधा चलनेवाले को,टक्कर लेना पड़ता है कहीं पत्थरों से,कहीं कांटों से सरल नहीं होता है उसे उतार-चढ़ावों को पारकर अपने रास्ते से… Read More