रंगो का त्यौहार है फूलो की बरसात है जीवन में उमंगो को जगाने रंग रसिया आया मेरे द्वार है।। ओ रंग रसिया तुम्हे कैसे रंग लगाए और कैसे खेले होली? स्नेह बेशुमार है, सात रंगों की फूआर है प्रेम मोहब्बत… Read More
रंगो का त्यौहार है फूलो की बरसात है जीवन में उमंगो को जगाने रंग रसिया आया मेरे द्वार है।। ओ रंग रसिया तुम्हे कैसे रंग लगाए और कैसे खेले होली? स्नेह बेशुमार है, सात रंगों की फूआर है प्रेम मोहब्बत… Read More
गया था आज उनके घर पूछने हाल चाल उनका। मगर थे नहीं घर पर वो इसलिए लिख आया पर्ची पर। जब आयेंगे वो घर पर तो पड़ लेंगे मेरी चिट्ठी। और मिलकर या लिखकर बताता देंगे अपना हालचाल।। मिला है… Read More
दिलमें दीपक जल उठे देख तुझे फिर से। लौटा हूँ अपने घर जो वर्षो के बाद। हाल तेरा मैं कैसे पूंछू बात करने से डरता हूँ। कहने सुनने के लिए नहीं बचा है अब कुछ।। मन की बातें मन ही… Read More
लिख तूँ लिख, सबकी सच्चाई लिख। सच लिखने में डरना मत, असली बकने में झिझकना मत। बेईमान तोय दबायेंगे, तूँ हरहाल में दबना मत। मौत से कभी डरना मत, काय मौत के बाद, फिर से जनम मिलता है। ईसें यी… Read More
मेरा मन बहुत चंचल है पर दिल मेरा स्थिर है। फिर भी सपनो में वो न जाने क्यों आते है। और अपने साथ होने का मुझे एहसास कराती है। जिसे कारण ही मेरी आत्मा व्याकुल उठती है।। मोहब्बत करने की… Read More
कई लोग ऐसे हैं बढ़-बढ़कर दूसरों से बोलते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपने आप से बोलते हैं अपने में दूसरों को देखना दूसरों में अपने को देखना सबसे बड़ी साधना है मनुष्य का, यथार्थ में, दुनिया में हम देखते… Read More
है प्यार बहुत देश हमारा हिन्दुतान। है संस्कृति इसकी सबसे निराली है। कितनी जाती धर्म के, लोग रहते यहाँ पर। सब को स्वत्रंता पूरी है, संविधान के अनुसार।। कितना प्यार देश है हमारा हिंदुस्तान। इसकी रक्षा करनी है आगे तुम… Read More
धधक उठी ज्वाला जौहर की राजस्थान कहानी थी । रतन सिंह मन-प्रेम पद्मिनी ,वो मेवाड़ की रानी थी। गन्धर्वराज घर की किलकारी,चम्पावती की मन ज्योति। सिंहलद्वीप की राजरागिनी , स्त्री की थी उच्चतम कोटि। सुंदरता तन में भी अनुपम ,मन… Read More
सर्दी मौसम में प्यार मोहब्बत की आपस में बातें होती है। सर्दी मौसम में मोहब्बत निभाने कि कसमे खाई जाती है। और चलता है दौर आपस में मेल मिलाप करने का। पर होती है दिलको पीड़ा सर्दी में बिछड़ ने… Read More
रास्ता सीधा नहीं होता धरती के अनुरूप वह,करवट लेता रहता है कभी बायें की ओर,कभी दायें की ओर सीधा चलनेवाले को,टक्कर लेना पड़ता है कहीं पत्थरों से,कहीं कांटों से सरल नहीं होता है उसे उतार-चढ़ावों को पारकर अपने रास्ते से… Read More