हिंदी हमारे जीवन की वह भाषा है, जिसमें हम अपने घर की चौखट से लेकर बड़े-बड़े मंचों तक सहजता से संवाद करते हैं। यह केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि हमारे संस्कारों और संस्कृति की धड़कन है।आज हम देखते हैं… Read More
हिंदी हमारे जीवन की वह भाषा है, जिसमें हम अपने घर की चौखट से लेकर बड़े-बड़े मंचों तक सहजता से संवाद करते हैं। यह केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि हमारे संस्कारों और संस्कृति की धड़कन है।आज हम देखते हैं… Read More
मैं हिंदी हूँ महोदय, मुझे विश्व में जाना जाता है, दुनिया में तीसरे स्थान पर, मुझे ही बोला जाता है। संविधान में राजभाषा का, दर्जा भी दिया जाता है, 14 सितंबर को, दिवस भी मनाया जाता है। राजकाज की भाषा… Read More
पत्रकारिता में प्रतिक्रिया : एक पाठक की कलम से” में समाज चेतना के विविध प्रसंग साहित्य समाज का दर्पण इसलिए है, क्योंकि समाज की वास्तविक स्थिति को विभिन्न माध्यमों से साहित्य ही सार्वजनिक करता है। साहित्य को समाज परिवर्तन का एक… Read More
“पृथ्वी घूम रही है, कहानी संग्रह में जीवन के संघर्ष” प्राचीन समय में भी मौखिक रूप से कथा कहानियों की परंपरा रही है। ज्यादातर कहानियों लोक कथाओं का विशेष महत्व रहा है। समकालीन हिंदी कहानी में भी समाज की विडंबनाएं,… Read More
मुंबई के कांदिवली इलाके की एक पुरानी बिल्डिंग की तीसरी मंज़िल पर वर्मा परिवार रहता था। मध्यमवर्गीय लेकिन बेहद संतुलित और खुशहाल। राजीव वर्मा एक निजी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थे, उनकी पत्नी नीलिमा गृहिणी थीं, और उनका इकलौता बेटा… Read More
शुभ श्रावण मास, शिव तत्व विचार, जहाँ शिव हैं, नंदी भी साथ धार।। जहाँ धर्म है, शिव भी वास करें, जहाँ शिव हैं, धर्म का प्रकाश भरे।। शिवजी का वाहन वृषभ धर्म स्वरूप, धर्म की सवारी, शिव करते अनूप।। जीवन… Read More
पत्नीजी गर्मी की छुट्टियों में मायके जाने लगीं। साले साहब लेने आये थे और उस पर तुर्रा यह था कि चार पहिया से लेने आये थे। बरसों पहले एम्बेसडर से ब्याह कर मेरे घर आई पत्नी अब स्कार्पियो से मायके… Read More
फूलों के जैसे मुस्कुराई बेटियाँ भंवरों के जैसे गुनगुनाई बेटियाँ माँ, बेटी, अनुजा और तिय के रूप में रिश्ता वो सभी से ही निभाई बेटियाँ बेटे की चाहत में यूँ माँ-बाप ने फिर कोख में ही मार गिराई बेटियाँ वर-दक्षिणा… Read More
सावन का महीना भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना में एक विशेष स्थान रखता है। यह वह समय है जब धरती हरी चादर ओढ़ लेती है, आकाश सावन की फुहारों से सज उठता है और हर ओर हरियाली और शीतलता का… Read More
मशहूर शायर जनाब निदा फ़ाज़ली साहब का एक शेर है- “कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन, फिर इसके बाद थोड़ा मुकद्दर तलाश कर”। मगर विज्ञापनों की दुनिया में तो हर काम तुरत-फुरत होना चाहिये । 1-मसलन अगर… Read More