कह दो कोई उनसे कि, बाग़ में आना-जाना छोड़ दें कह दो कोई उनसे कि, फूलों से अदा चुराना छोड़ दें खुशबू बनके दफ़न है सीने में मेरी सासें जिनकी कहदो कोई उनसे कि, बालों में गज़रा लगाना छोड़ दें… Read More
कह दो कोई उनसे कि, बाग़ में आना-जाना छोड़ दें कह दो कोई उनसे कि, फूलों से अदा चुराना छोड़ दें खुशबू बनके दफ़न है सीने में मेरी सासें जिनकी कहदो कोई उनसे कि, बालों में गज़रा लगाना छोड़ दें… Read More
आभार प्रकट करते हैं हम उस महामानव को जिसने हमारे प्रज्ञा चक्षु खोले कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन का वह पुत्र सर्वसंग परित्यागी गौतम नाम धारी महाकारूणिक था, जिसने जीने का सही ढंग मानव समाज को सिखाया । हम चलेंगे उस… Read More
हम देखते हैं, सूखे हुए पेड़ों को जर्जरित पौधों को कठिन काल की हर दौर में एक पीड़ा है उनकी जिंदगी ये चीखते नहीं, चिल्लाते नहीं है व्यथा का मुंह कभी खोलते ही नहीं कुछ मांगते नहीं गिड़गिड़ाते दिखते नहीं… Read More
आज पूरा देश कोरोना के आतंक से परेशान है कोई कहता शैतान तो कोई कहता हैवान है चार बार नहाते है दिन में, सौबार चमकाते हाथ हैं शान से कहती है मेरी बीवी, देखो घर में कितना काम है सारे… Read More
पलायन, महज घर छोड़ कर जाना ही नहीं होता पलायन सपनों का बिखर जाना और हृदय का भर जाना होता है गहरे घावों से सर पर पोटली लिए गोद में बच्चे लिए बुजुर्गों को पीठ पर लादे दहकती गर्म कंक्रीट… Read More
तू ही तपस्या है तू ही धर्म है त्याग है तू तू ही हकीकत है तू ही इबादत है खुदा का प्यारा ख्वाब है तू माँ शब्द ये छोटा पर रिश्ता सबसे बड़ा होता है जब हम कोख में पलते… Read More
टूटे मेरे दिल ने फिर, दुआ कर लिया तो हुई क्या ख़ता गर, प्यार कर लिया तो किसी हमनशी को, इश्क़-ए-असर में ख़ालिस-ए-मोहोब्बत, खुदा कर लिया तो तनहा तबाह कबसे, थी मेरी ज़िन्दगी क़फ़स क़ैद में कबसे, थी मेरी ज़िन्दगी… Read More
माँ इन चंद पन्नों में तुझे लिख नही सकता । माँ का सिर्फ एक दिन हो ऐसा कह नही सकता । माँ.. माँ हर पल है हर सांस है हर दिन, हर महीना हर साल है माँ.. माँ नदिया है… Read More
आदमी मिट्टी का पुतला है और जो चीज मिट्टी से बनती है वह मिट्टी में ही मिल जाती है किंतु इस तरह से मिल जाना मिट्टी में कि कोई कंधा देने वाला भी न हो कुछ हजम नहीं होता। संक्रमण… Read More
कितनो के पुत्र आजकल, करते मां बाप की सेवा। सब कुछ उन पर लूटकर, खुद बन जाते है भिक्षुक।। और पुत्र इन सब का, कैसे अदा करते है कर्ज। भेज उन्हें बृद्धाश्रम में, फिर भी कहलाते पुत्र।। कलयुग की महिमा… Read More