मेरी आरज़ू रही आरज़ू, युँ ही उम्र सारी गुज़र गई। मैं कहाँ-कहाँ न गया मगर, मेरी हर दुआ भी सिफ़र गई।। की तमाम कोशिशें उम्र भर, न बदल सका मैं नसीब को। गया मैं जिधर मेरे साथ ही, मेरी बेबसी… Read More
मेरी आरज़ू रही आरज़ू, युँ ही उम्र सारी गुज़र गई। मैं कहाँ-कहाँ न गया मगर, मेरी हर दुआ भी सिफ़र गई।। की तमाम कोशिशें उम्र भर, न बदल सका मैं नसीब को। गया मैं जिधर मेरे साथ ही, मेरी बेबसी… Read More
होठों पर हंसी हो आँखो में नमी हो। दिल में सुकून हो। तो खुशी झलकती है। और चेहरा कमल सा एक दम खिलता है। इसलिए तो सभी से इनका दिल मिलता है।। जीवन तो मिला है यहाँ हर किसी को।… Read More
फुटपाथ के दुकानदार ने सख्त लहजे में कहा “ यहां से जाओ चाचा , अस्सी रुपये में ये चप्पल नहीं मिलेगी,बढ़ाओ अपनी साइकिल यहाँ से “। ये सुनकर वो सोच में पड़ गए कि फुटपाथ की सबसे सस्ती दुकान पर… Read More
कही पर बहुत खुशाली है कही पर बहुत उदासी है। कही पर यश कीर्ति है। कही पर नाम मात्र है।। न गमो में उदास रहते है। न खुशी में उछलते है। समानता के भाव हम। सदा ही दिलमें रखते है।।… Read More
सफर में आनंद आता है। जब एक जैसे मिल जाए। पता ही नहीं पड़ता है। कब मंजिल पर पहुँच गए। लोगों की बातें हमें बहुत कुछ सिखाती है। जो जिंदगी में हमारे बहुत ही काम आती है। कहने को सभी… Read More
एक थी श्रद्धा माता-पिता दुलारी गई भटक रिश्ता भी धोखा दिल टूटा श्रद्धा का केवल पीड़ा ना वो आजादी मां-बाप बिन शादी गत श्रद्धा की ना प्रेम पला ना रहा लिव-इन जग-हसाई न रहा प्यार केवल व्यभिचार श्रद्धा व ताब… Read More
दीप मोहब्बत के मैं दिल में जलता हूँ। स्नेह प्यार की गंगा हर घर में बहता हूँ। दिल में पड़े गये जो बीज नफरत के। उन्हें मिटाने को प्रेम बरसात हूँ प्रेम बरसात हूँ।। दीन दुखी के दिलो में आस… Read More
आँखे अँधी है, कान है बहरे , हाथ पांव भी भले विकल । वाणी-बुद्धि में बनी दुर्बलता , विश्वास-हौसला सदा अटल । अक्षमताओं से क्षमता पैदा कर , विकलांग से हम दिव्यांग कहाए । परिस्थितियों से लोहा लेकर ही ,… Read More
तेरे दर पर जो आता है वो कुछ न कुछ तो पाता है। इसलिए तो तेरे दर से कोई भूखा नहीं जाता। सभी को अपने होने का तू एहसास कराती है। इसलिए बुलाबा भी तू सभी को भेजती हो।। सभी… Read More
सोया था मैं गहरी नींद में , एक मुझे सपना आया । हाथ पकड़कर ,गहन झंझोड़कर , जैसे था मुझे नींद जगाया । एक दिखा अस्पष्ट सा साया , जो धुंधला सा लगता था । जिसने खुद को था ‘श्रद्धा’… Read More