श्रेणी

देवरिया से इज़रायल तक का सफ़र

मेरा नाम नवीन मणि त्रिपाठी है। हाल ही में मैंने इजराइल के बेन गुरियान विश्वविद्यालय (Ben-Gurion University of the Negev) से पी-एच.डी. कंप्लीट की है। अभी फिलहाल Particle Scientist के तौर पर बेल्जियम में काम कर रहा हूँ। देवरिया जिला… Read More

हादसे: स्त्री मुक्ति के संदर्भ में

हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श के अंतर्गत समय–समय पर स्त्री जीवन की नई समस्याओं और नए मुद्दों पर तार्किक ढंग से चर्चा की जा रही है। साहित्य की अन्य विधाओं में जहाँ लेखक इन परिवर्तनों को आत्मसात कर प्रवक्ता के… Read More

मूवी रिव्यू : बाटला हाउस ‘ए हिडेन स्टोरी’

19 सितंबर 2008 में दिल्ली के ओखला इलाके में बाटला हाउस मकान नंबर L-18 में हुए एनकाउंटर की घटना की अनकही अनछुई स्टोरी से रूबरू कराती है ये फिल्म। जहां एक ओर दिल्ली पुलिस की अपनी सच्चाई है तो वहीं… Read More

हम सबको आज़ादी मुबारक़

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी की अदला बदली, लाखों लोगों के विस्थापन और लाखों निर्दोषों का लहू बहाने के बाद 14-15 अगस्त की मध्य रात्रि को हमें मिली आज़ादी की खुशबू कुछ अधिक प्रीतिकर होती अगर विभाजन का दंश हमें… Read More

व्यंग्य : सैंया ले गयी जिया तेरी पहली नज़र

गीत के बोल आज के समय में उन धनकुबेरों पर बिल्कुल सही बैठता है, जो अपनों को आज कौन, क्या, कब लेकर चला जायेगा कह नही सकते। कोई किसी के मन को ले गया तो वहाँ भी राजनीति थी, अब… Read More

शोध लेख : स्वतंत्रता पूर्व हिंदी सिनेमा में नृत्य

मूक दौर में नृत्य हिन्दुस्तानी सिनेमा में नृत्य का समावेश कैसे हुआ और किस प्रकार किन पड़ावों से गुज़रते हुए उसने अपना सफ़र तय किया आदि की विस्तार से चर्चा करने से पूर्व यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि भारत… Read More

15 अगस्त की ढेरों शुभकामनाएं

मैं स्पष्ट कर देना चाहती हूं, कि, अधोलिखित विचार किसी व्यक्ति, राजनैतिक पार्टी, मंत्री या संस्था विशेष से जुड़े हुए नहीं हैं, इस संदर्भ में मैं पूर्णत: न्यूट्रल हूं। मैं अपने विचार वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के… Read More

ये कश्मीर है…

इस बार ईदुल अजहा पर कश्मीर की शांति देखकर मन प्रसन्न है। संभवतः यह पिछले बीस वर्षों की यह पहली ईद होगी, जिसमें सर्वत्र शांति है और देशद्रोही ताक़तों के हौसले पस्त हैं। ऐसे में मुझे लगता है कि कश्मीर… Read More

व्यंग्य : डाल डाल की दाल

“दाल रोटी खाओ, प्रभु के गुण गाओ” बहुत बहुत वर्षों से ये वाक्य दोहरा कर सो जाने वाले भारतीयों का ये कहना अब नयी और मध्य वय की पीढ़ी को रास नहीं आ रहा है। दाल की वैसे डाल नहीं… Read More

हिंदी सिनेमा में हिंदी की स्थिति

भारत जैसे बहुभाषी और बहु-सांस्कृतिक परंपरा वाले देश में सिनेमा की व्यापक पहुंच ने इसे लोगों के मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम बना दिया है और इसमें हिंदी भाषा का व्यापक योगदान है।  1931 में पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’… Read More