gyan ki mata

गीत : विद्या की माता शारदे

वो ज्ञान की माता है सरस्वती नाम है उनका-२। वो विद्या की माता है। शारदा माता नाम उनका। वो ज्ञान की माता है।। हाय रे मनका पागलपन मुझ से लिखवाता है। क्या मुझे लिखना क्या वो लिखवाता ये तो वो… Read More

prem

एक बरस में मौसम चार

एक बरस में मौसम चार, यह फिल्मी गाना बहुत लोकप्रिय है। जहाँ पाँचवे मौसम के रुप में ‘प्यार” के मौसम की बात होती है।जब हम इस पाँचवे मौसम की तह तक जाते है तो इस भाव को व्यक्त करने के… Read More

pulwama attack

पुलवामा अटैक

“देश को जिसने हमें सौंपकर बदले में सिर्फ मौत पाई कैसे न करें हम उन्हें याद, मौका परस्त कहलाएगा गर आज उनकी याद न आई।।” आज पुलवामा अटैक को 2 वर्ष पूरे हो गए , जिसमे हमारे देश के कई… Read More

nari

कविता : नारी के शब्द

मज़बूर हूँ मैं। मगर ये मत समझना, कि कमज़ोर हूँ। मज़बूत हूँ मैं, साथ ही ग़रीब हूँ। मगर लाचार नहीं।। तेरे शोषण का सुबूत हूँ मैं, तेरी ही पहचान हूँ मैं। फिर भी अपनों के लिए कार्य कर रही हूँ।… Read More

basant

कविता : बसंत की बेला आई

बसंत की बेला आई मन में महक जगाई अब तू भी जी ले कुछ पल को मन में यह फूल खिलाई बसंत की बेला आई।। मन की बागियों में अब तू हंसियो के फूल खिला दें यादों की सोंधी सी… Read More

manzile

कविता : मंजिले मिल जाती है

नदियाँ खुद अपनी चाल से रास्ते बना लेती है। बड़े-बड़े पहाड़ों को भी चीर कर आगे निकल जाती है। क्योंकि उन्हें अपने आप पर विश्वास होता है। इसलिए उन्हें आदर से पूजा जाता है।। इरादे हो अगर नेक तो मंजिले… Read More

gaanv

कविता : गाँवो में जाकर देखो

सोच बदलो गाँव बदलो अब चलो गाँव में। तभी हम गाँवो को खुशहाल बना पाएंगे। और नया हिंदुस्तान हम मिलकर बनाएंगे। और गाँवो का इतिहास एक बार फिर से दोहरायेंगे। गाँवो की मिट्टी का कोई जवाब नहीं है। पैरो में… Read More

baal shram

लेख : बाल श्रम

आओ मिलकर हम सब सुंदर भारत का निर्माण करें…. किसी बच्चे का दामन न छूटे अपने बचपन से रोंदे न कोई उसके सपनों को बाल श्रम के घन से कोई छीने न इनसे इनका भोलापन फिर न कोई छोटू मज़बूर… Read More