dil(2)

दोहा : सवा-शतक

‘अजस्र’ किरपा गणेश की, सारों सगरे काम । वाणी, मात-पिता सहित, लियो राम का नाम॥ ‘अजस्र’ शक्ति उस देवी से, सीता सत का नाम । कलम-मसी करते रहें, वीणापाणि प्रणाम ॥ ‘अजस्र’ बली तुम पवन से, शंकर-सुवन प्रणाम । ‘सवा-शतक’… Read More

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कविता : विचारों के कारखाने में

क्या है…? मेरे अंदर छिपाने का बाल्य काल से ही मैं नंगा था, पुस्तकों में मस्तक लगाके ढ़ूँढ़ता था, मैं अपने आपको, आंतरिक दुनिया में, कौन हूँ मैं आखिर…? विचार कई थे मेरे, चक्कर काटने लगे, पागल था मैं, पुस्तकालय… Read More

zamana

कविता : जमाने को जाने

बहुत संसार को देखा और बहुत इसको सुना। जमाने की हर बातों का बहुत मंथन भी किया। मैं अपने बातों को भी इस जमनो को दे सका। और लोगों की सोच को कुछ हद तक बदल सका।। विधाता ने जमाने… Read More

krishan holi

कविता : होली अपनो के संग

आओ हम सब, मिलकर मनाएं होली। अपनों को स्नेह प्यार का, रंग लगाये हम। चारो ओर होली का रंग, और अपने संग है। तो क्यों न एकदूजे को, रंग लगाए हम। आओ मिलकर मनाये, रंगो की होली हम।। राधा का… Read More

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कविता : रंग रसिया

रंगो का त्यौहार है फूलो की बरसात है जीवन में उमंगो को जगाने रंग रसिया आया मेरे द्वार है।। ओ रंग रसिया तुम्हे कैसे रंग लगाए और कैसे खेले होली? स्नेह बेशुमार है, सात रंगों की फूआर है प्रेम मोहब्बत… Read More

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व्यंग्य : फिजेरिया

“सूट पहन के , लगा के चश्मा कहाँ चले ओ मतवाले , गिटपिट इंग्लिश बोल रहे हो हिंदी की गले में तख्ती डाले” मैंने यूँ ही पूछा? “चले हम फीजी ,हिंदी के लिये जल मत ओ बुरी नजर वाले पूछा… Read More

dil tut gaya

कविता : टूट ना जाये

गया था आज उनके घर पूछने हाल चाल उनका। मगर थे नहीं घर पर वो इसलिए लिख आया पर्ची पर। जब आयेंगे वो घर पर तो पड़ लेंगे मेरी चिट्ठी। और मिलकर या लिखकर बताता देंगे अपना हालचाल।। मिला है… Read More

shivaji

विज्ञापन : शिवाजी जयंती

मातृभूमि से है गहरा नाता, शिवाजी महाराज की है यह गाथा, बाल शिवाजी को माता जीजाबाई ने, देश प्रेम का ज्ञान दिया, वीर शिवाजी के पिता ने, रण कौशल का ज्ञान दिया शिवाजी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 00

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कविता : दिल और मन

दिलमें दीपक जल उठे देख तुझे फिर से। लौटा हूँ अपने घर जो वर्षो के बाद। हाल तेरा मैं कैसे पूंछू बात करने से डरता हूँ। कहने सुनने के लिए नहीं बचा है अब कुछ।। मन की बातें मन ही… Read More

zindagi(1)

व्यंग्य : मैं व्यंग्य समय हूँ

तो हस्तिनापुर के समीप इंद्रप्रस्थ जो कि अब दिल्ली के नाम से जाना जाता है , यही मेरे व्यंग्य का खांडव वन रहा है ।अब व्यंग्य के कई अर्जुन मेरे इस खांडव वन अर्थात व्यंग्य लोक को जलाने पर आतुर… Read More