berojgari

कविता : बेरोजगारी की हद

शिक्षित होकर भी देखा घर पर रहकर भी देखा सभी कहते मै बेरोजगार कोई कहता काम करो। शिक्षित घरेलू क्रियाकलापों में असहाय सभी शिक्षित को रोजगार भी नहीं। मजबूर शिक्षित रोजगार की तलाश में गुमसुम जैसा चाहे वैसा नहीं दर… Read More

patthar

कविता : पत्थर की कहानी

कहानी पत्थर की सुनता हूँ तुमको। बना कैसे ये पत्थर जरा तुम सुन लो। नरम नरम मिट्टी और रेत से बना हूँ मैं। जो खेतो में और नदी के किनारे फैली रहती थी। और सभी के काम में बहुत आती… Read More

vishva yudha

गीत : विश्व युद्ध के काले बादल

अधिकारों की करें सुरक्षा, कर्तव्यों की करें फालना। विश्व युद्ध के काले बादल, नहीं गगन पर छा पाएंगे।। अधिकार कर्तव्य तो हरदम, साथ रहे हैं साथ रहेंगे। इसके अधिकारों को ही तो, हम उसके कर्तव्य कहेंगे।। सामाजिक प्राणी है हम… Read More

mahamanav bano

कविता : महामानव बनो

विश्व चेतना के बीज हे मनुष्य ! अंकुरित होने दो तुम्हारे निर्मल चित्त में लहलहाती फ़सलों की सरसराने दो, स्वेच्छा वायु से बचाते रहो अपनी रौनक को मूढ़ विचारों से, बौद्धिक चेतना का हरियाली तुम बनो अनवरत साधना में सत्य… Read More

prem vedna

कविता : प्रेम वेदना

प्रेम वेदना क्या होती है प्रेम करके स्वयं देख लो। कष्ट किसी को भी हो सहन दोनों को पड़ता है। मीरा कृष्ण के प्यार को सुना और पढ़ा होगा। प्रेम में मीरा को जहर पीना पड़ा था और वेदना कृष्ण… Read More

prem paridhi

कविता : प्रेम परिधि

बिंदु और रेखा में परस्पर आकर्षण हुआ तत्पश्चात् आकर्षण प्रेम में परिणत धीरे-धीरे रेखा की लंबाई बढ़ती गई और वह वृत्त में रूपांतरित हो गयी उसने अपनी परिधि में बिंदु को घेर लिया अब वह बिंदु उस वृत्त को ही… Read More

bagheli

बघेली कविता : ठकुरन का ठाकुराइसी लाइगय

ठकुरन का ठाकुराइसी लाइगय, बम्हनन का बमनाइत आ खाय का उनके पुजय न, पै लड़का करै न कमाइत। मुर्गा बोकरा नशा शराब बम्हनन का लालचामय। आ कोऊ उन्है जो या कही देय ता गारी ख़ुद का ख़बामय।। पूजा पाठ जनेऊ… Read More

beti

कविता : बेटी बचाओ और खुशी पाओ

नसीब वाले होते है वो घर परिवार जहाँ जन्म लेती है बेटी। परिवारों की जान होती है बेटी। घर की लक्ष्मी होती है बेटी। सुसराल में सीता दुर्गा होती है बेटी। दो कुलो की शान होती है बेटी।। बेटी की… Read More

aangdan

कविता : अंग दान

जिंदगी में बहुत लोगों के तुम काम आये हो। मर कर भी साथ तुम लोगो का निभा जाओ। अपने अंगों को तुम औरों को दान कर जाओ। और जाते-जाते खुद ही अंतिम उपकार कर जाओ।। देकर जीवन दूसरों को मानव… Read More

Beti

कविता : बेटी क्या श्राप है

सर उठा कर चल नहीं सकता बीच सभा के बोल नहीं सकता घर परिवार हो या गांव समाज हर नजर में घृणा का पात्र हूँ। क्योंकि “बेटी” का बाप हूँ ।। जिंदगी खुलकर जी नहीं सकता चैन की नींद कभी… Read More