दीपावली प्रभु श्रीराम की रावण पर विजय के उपरांत अयोध्या के उत्सव का प्रतीक है, जहां उनके भव्य राजतिलक के अवसर पर अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर उनके राजतिलक की स्मृतियों को शाश्वत कर दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार… Read More
दीपावली प्रभु श्रीराम की रावण पर विजय के उपरांत अयोध्या के उत्सव का प्रतीक है, जहां उनके भव्य राजतिलक के अवसर पर अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर उनके राजतिलक की स्मृतियों को शाश्वत कर दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार… Read More
हाँ, तुम्हारी मृदुल इच्छा हाय मेरी कटु अनिच्छा था बहुत माँगा ना तुमने किंतु वह भी दे ना पाया था मैंने तुम्हे रुलाया… ये एक तसल्ली भरा सन्देश है उन लोगों की तरफ से जिन्होंने इस बार मन के रावण… Read More
जीवन के 25 वसन्त में यह तीसरी दिवाली होगी जब बिना पिता जी के आशीर्वाद के दिवाली बनाई जाएगी और मेरे जहन में वो यादें हमेशा ताज़ा बनी रहेंगी जो पिता जी के साथ बनी थीं। उन्हें ताउम्र अपने जीवन… Read More
ऑनर किलिंग पर बनी यह फिल्म हार्डहिटिंग है और फिल्म सैराट से प्रेरणा लेती दिखाई देती है। ऑनर किलिंग पर बनी ‘प से प्यार फ़ से फ़रार’ कोई इस तरह के विषय पर बनने वाली पहली या आखरी फ़िल्म नही… Read More
सांड की आंख फ़िल्म को बनाने से पहले इस फ़िल्म में मुख्य कलाकार को लेकर काफी विवाद हुआ था। लेकिन अब जब बेहतरीन कास्टिंग के साथ फ़िल्म आई है तो बहादुरी और बुलंद आवाज बनकर उभरती है। फिल्म में भूमि… Read More
भारत में हर त्यौहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है और जब दिवाली की बात आती है तो कुछ अलग ही माहौल बन जाता है। क्योंकि दिवाली का त्यौहार भारत देश में सबसे ज्यादा धूम-धाम के साथ मानाया जाता… Read More
इंद्रधनुषी रात थकने सी लगी है। भोर में कोयल कुहकने सी लगी है।। गीत मंगल के सजे तोरण कलश पर तलहथी की छाप उगने सी लगी है।। गंध-मेंहदी ने किया तन-मन सुवासित बाग में बेला चमकने सी लगी है।। छंद… Read More
गाँव के एक घर में आग लग गई थी, वहीं गाँव के मंदिर में लोग नारियल फोड़ रहे थे। जिस घर में आग लगी थी उस घर का लड़का एक रात किसी दूसरे गाँव की लड़की के साथ उस मंदिर… Read More
हिंदी साहित्य में नई वाली हिंदी के नाम से मुकाम बना रहे आज के लेखकों में प्रेम सबसे महत्वपूर्ण और केन्द्रीय बिंदु बनकर उभरा है। लेकिन अभी तक मुझे उस तरह के प्रेम में डूबे कहानी के नायक या नायिकाएँ… Read More
हिन्दी साहित्य आदिकाल से लेकर आज तक के दो हज़ार वर्ष से भी अधिक का एक दीर्घकालिक समयांतराल पार कर चुका है। इस दौरान इसमें कई आंदोलन हुए, कई विचारधाराओं ने जन्म लिया तथा अपनी साँसें स्वर्णिम इतिहास के रूप… Read More