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चौबीस घन्टे रहता यो तै माटी गेल्या माटी अन्नदाता का हाल देख मेरी छाती जा सै पाटी 1 बिन पाणी बता क्यूंकर करै बिजाई रै नहीं टेम पै मिलते बीज , दवाई रै कदे खाद पै मारा – मारी ,… Read More
मेरे गीतों की सुनकर आवाज़ तुम। दौड़ी चली आती हो मेरे पास। और मेरे अल्फाजो को अपना स्वर देकर। गीत में चार चांद तुम लगा देती हो।। लिखने वाले से ज्यादा गाने वाले का रोल है। चार चांद तब लग… Read More
नई शिक्षा नीति में बहुत से परिवर्तन लक्षित होते हैं । यह परिवर्तन समय की मांग भी थी क्योंकि 1986 के उपरांत बहुत सी स्थितियां बदली है जिससे हमारे शिक्षा नीति में भी परिवर्तन की मांग मुखर होने लगी थी… Read More
साभार : साहित्यायन समूह +70
दिल उदास बैठा है आज तेरे रूठने से, आ पास मेरे तू किसी भी बहाने से!! ना दिन में चैन ना रात को करार है, नींद मेरी वापस दे जा किसी बहाने से!! बेचैन है दिल सासें थम सी जाती… Read More
अ से फल अमरूद का मीठा आ से मीठा आम इ से खट्टी इमली बिकती ई से ईख के दाम उ से उल्लू, वह पक्षी जो रात-रात भर जागे ऊ ऊन का देख के स्वैटर सर्दी उल्टा भागे ऋ से… Read More
(01) आन बान शान वाला, नोबेल वे साहित्य का, पाने वाले एशिया के, प्रथम सपूत थे। नाम था रवीन्द्रनाथ, गुरुदेव लोग जिन्हें, कहा करते थे सभी, भारती के पूत थे।। भारतीय सांस्कृतिक चेतना जगाने वाले, रखते थे ज्ञान की वे… Read More
पुस्तक – आतंकवाद पर बातचीत सम्पादक द्वय – डॉ० पुनीत बिसारिया , रोनी ईनोफाइल प्रकाशक – यश पब्लिकेशंस, दिल्ली ISBN नंबर – 978-93-85689-80-2 प्रथम संस्करण – 2018 मूल्य – 695/- समीक्षक – तेजस पूनिया हाल ही में एक फिल्म रिलीज… Read More
बहुत छेड़ा करते थे, प्रकृति के संसाधनो को। ये सब देखते रहे, श्रृष्टि के वो निर्माता। और हंसते रहे भाग्यविधाता, जिसने लिखा है भाग्य तेरा। अब तो तू संभल जा, और समय को समझ जा। क्योंकि समय की मार ने,… Read More