भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) का 50वां संस्करण गोआ में बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ। 20 नवंबर की शाम करण जौहर के संचालन और अमिताभ बच्चन व रजनीकांत जैसे दो महानायकों की उपस्थिति में इस समारोह की रंगारंग शुरूआत हुई… Read More
भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) का 50वां संस्करण गोआ में बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ। 20 नवंबर की शाम करण जौहर के संचालन और अमिताभ बच्चन व रजनीकांत जैसे दो महानायकों की उपस्थिति में इस समारोह की रंगारंग शुरूआत हुई… Read More
विद्यासागर की वाणी सुनो। ज्ञान अमृत का रसपान करो। ज्ञानसागर दिव्य ध्वनि सुनो। जैन धर्म का पालन करो। विद्यासागर की वाणी सुनो।। आज हम सबका यह पुण्य है। मिला है हमें मनुष्य जन्म। किये पूर्व में अच्छे कर्म। इसलिए मिला… Read More
कुछ तो बात है उनमें, तभी लोग उनके हो जाते है। अपने अपने प्यार का इजहार करने, गुलाब का फूल लेकर, बार बार सामने जाते है। भले ही कुछ बोल न सके, पर अपनी बात गुलाब दिखकर समझते है। और… Read More
हँसता हुआ चेहरा, प्यारा लगता है। तेरा मुझे देखना, अच्छा लगता है। घायल कर देती है तेरी आँखे और मुस्कान। जिसके कारण पूरा दिन, सुहाना लगता है।। जिस दिन दिखे न तेरी एक झलक। तो मन उदास सा, हो जाता… Read More
इन दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में ढेरों फिल्म समारोह आयोजित किए जाने लगे हैं। लेकिन इनमें से कुछ एक ही हैं जिन्होंने अपने अलग-से विषयों के चलते देश-विदेश में पहचान हासिल की है। ऐसा ही एक फिल्म समारोह है… Read More
“नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू ही सही नहीं विसाल मयस्सर तो आरजू ही सही “ जी नहीं ये किसी हारे या हताश राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ता की पीड़ा या उन्माद नहीं है। बल्कि हाल के दिनों में तीन सौ… Read More
वह किसी नन्ही सी गुड़िया के लिए सुकून का ठिकाना, वह किसी निराश सर के लिए मजबूत कंधे का बहाना, वह किसी बच्चे को दौड़ते हुए समय से स्कूल पहुंचाना, वह किसी बूढ़ी माँ के रोगों का एकमात्र दवाखाना, वह… Read More
बाप ही एक ऐसी सम्पत्ति होता है। जिसे बेटा पूरी तरह दूसरे भाईयों को देने के लिए तैयार रहता है। बुढ़ापा तो उसी दिन शुरू हो जाता है। जब हम जाने अनजाने उसके खिलाफ लड़ाई शुरू कर देते हैं। पिता… Read More
हाल ही में एक ट्वीट ने काफी सुर्खियां बटोरी , “पूत कपूत तो क्यों धन संचय पूत सपूत तो क्यों धन संचय” जिसमें अमिताभ बच्चन साहब ने सन्तान के लिये धन एकत्र ना करने का स दिया उपदेश दिया है… Read More
क्या था बचपन याद आ रहे है हमें, वो बचपन के दिन। जिसमे न कोई चिंता, और न ही कोई गम। जब जैसा जहां मिला, खा पीर हो गए मस्त। न कोई जाति का झंझट, न कोई ऊंच नीच का… Read More