Nature

कविता : प्रकृति

विध्वंसक धुंध से आच्छादित दिख रहा सृष्टि सर्वत्र किंतु होता नहीं मानव सचेत कभी प्रहार से पूर्वत्र सदियों तक रहकर मौन प्रकृति सहती अत्याचार करके क्षमा अपकर्मों को मानुष से करती प्यार आती जब भी पराकाष्ठा पर मनुज का अभिमान… Read More

girls-scream

लघु कथा : चीख

रेशमा, कुदसिया दोनों के लिए आज का दिन भी हमेशा जैसा ख़ुशगवार था। सूरज में सुर्ती थोड़ी कम थी इन दिनों। रेशमा की शादी की तैयारियाँ चल रही थी। इसी सिलसिले में रेशमा अपनी सहेली और बहन ज्यादा जैसी कुदसिया… Read More

nirbhaya-rape-case

क्या सच में मन में पाप नहीं?

अजीब सी भावनाओं के साथ एक लेखक होने के कारण मज़बूरी में लिखना कही न कही थोड़ा जरुरी सा हो गया वो भी तब थोड़ी अजीबो- गरीब हरकते समाज के कुछ महत्वपूर्ण और कर्मठ युवाओं के द्वारा देखने को मिल… Read More

कविता : आवाज़

तू कर सके तो ऐसा क़र कि नाम हो तेरा काम हो.. तू धूप बन, तू छाव बन जिसकी जरुरत आन हो ।। तू आग बन कुछ इस तरह कि ठण्ड की कोई शाम हो। तू लौ बने अंधेरों की… Read More

कविता : समझ नहीं आता हम भारत को कैसे स्वच्छ करें!

समझ नहीं आता हम भारत को कैसे स्वच्छ करें? क्या वही थी वो गंगा, अविरल सी बहती, जहाँ वायु में शुद्धता का समावेश था। कितना सुंदर था हमारा भारत कितना स्वच्छ था हमारा भारत पूरे विश्व में शुद्धता का  परिमाण… Read More

लघुकथा : नालायक बेटा

रामानंद बाबू को अस्पताल में भर्ती हुए आज दो महीने हो गये। वे कर्क रोग से ग्रसित हैं। उनकी सेवा-सुश्रुषा करने के लिए उनका सबसे छोटा बेटा बंसी भी उनके साथ अस्पताल में ही रहता है। बंसी की मां को… Read More

कविता : चाह नहीं

दिल की चाह मान सम्मान, पाने की कभी नहीं रही। लिखा मेरा शौक है, और हिंदी मेरी माँ हैं। इसलिए विश्व की ऊंचाईयां, मां को दिलाना चाहता हूँ। और माँभारती की सेवा करना, अपना फर्ज समझता हूँ।। इसलिए में साफ… Read More

कविता : बहन

दिखती है जिसमें  मां की प्रतिच्छवि  वह कोई और नहीं होती है बान्धवि जानती है पढ़ना भ्राता का अंतर्मन अंतर्यामी होती है ममतामयी बहन है जीवन धरा पर जब तक है वेगिनी उत्सवों में उल्लास  भर देती है भगिनी  +120

कविता : कोरोना से लड़ना है

कोरोना रुला रहा है, हम सब को। सभंल जाओ लोगो अब तो, छोड़ो मिल मिलाप को। दूरियां बनाओ तुम सबसे, तभी सुरक्षित रह पाओगे।। नियम साधना का करो, पालन अब तुम सब। तो बच जाओगे, इस कोरोना से तुम। अमल… Read More

कविता : संभल कर रहो

जान ले रहा है ‘कोरोना’, अब हिंदुस्तान में। अब संभल कर रहो, अपने-अपने घरों में। कैसी बीमारी ये आई, जान पर आफत आई। न कोई समझे-न ही जाने, बस हाँ में हाँ सबकी मिलानी। कैसे ले रही है, जान इंसानों… Read More