poem chandani raat

कविता : चांदनी रात

ओढ़कर प्यार की चुनरिया, चांदनी रात में निकलती हो। तो देखकर चांद भी थोड़ा, मुस्कराता और शर्माता है। और हाले दिल तुम्हारा, पूछने को पास आता है। हंसकर तुम क्या कह देती हो, की रात ढलते लौट जाता है।। चांदनी… Read More

poem dil behal hai

कविता : दिल बेहाल है

किसी का क्या जो कदमो पर, जबी ए बंदगी रख दी। हमारी चीज थी हमने, जहाँ जानी वहां रख दी। जो दिल माँगा तो वो बोले, ठहरो याद करने दो। जरा सी चीज थी हमने, न जाने कहाँ रख दी।।… Read More

poem chahat lekah ki

कविता : चाहत लेखक मनोहर की

चाह नहीं मैं एम.पी. बनकर, संसद में बहस लगाऊँ चाह नहीं मैं वक्ता बनकर, दुनिया को हीं मूर्ख बनाऊँ चाह नहीं मैं पहलवान बनकर, कमजोरों को खूब सताऊँ चाह नहीं मैं मालिक बनकर, ऑर्डर नौकर पर बेहिसाब चलाऊँ चाह नहीं… Read More

Kargil Vijay Diwas

कविता : कारगिल विजय गाथा

भारत पाक कारगिल युद्ध विजय अभियान जब भू पर मर्यादा भंग हो सदा बहते वीरों के खून रहे हो अमन चैन कैसे जब उर में दुश्मन का चढ़ा जुनून रहे कारगिल पर कब्जा करके बने दुश्मन अफलातून रहे देश प्रेमी… Read More

kavita ye zindagi ji lene de

कविता : ए जिंदगी जी लेने दे

घूँट ज़हर के अब पी बहुत लिये है, ज़रा एक घूँट अमृत का भी पी लेने दे, “ए जिंदगी” कुछ पल तो मुझको अपनी मर्जी से जी लेने दे। कुछ समाज की बंदिशों ने रोका, कुछ अपनों ने है मुझको… Read More

poem aatma phir teri dhdhak na jaye

कविता : आत्मा फिर तेरी धधक ना जाये

नयनों का जल ढ़रक ना जाये आत्मा फिर तेरी धधक ना जाये। नारी अपने मन की बातें, रहने दे मर्यादा में हीं तू मत कर बेवजह की बातें, आग ना लगा तू तन मन में आज नहीं आयेंगे कान्हा जग… Read More

poem yaad rahoge

कविता : याद रहोगे

हम सब एक दिन मर जाएंगे। इस संसार से मुक्ति पा जायेंगे। और छोड़ जाएंगे अपनी लेखनी व कर्म। जिस के कारण ही याद किये जाएंगे।। शब्दो के वाण दिल को बहुत चुभते है। दिलसे जुड़ी बातों को ही याद… Read More

poem door ho gaye hai

कविता : दूर हो गये

कैसा ये दौर आ गया है, जिसमें कुछ नहीं रहा है। और जिंदगी का सफर, अब खत्म हो रहा है। क्योंकि इंसानों में अब, दूरियाँ जो बढ़ रही है। जिससे संगठित समाज, अब बिखर रहा है।। इंसानों की इंसानियत, अब… Read More

poem kese jiya jaye tum bin

कविता : कैसे जिया जाये तुम बिन ?

कैसे बताऊँ क्या हो गई ? मेरी ज़िन्दगी तुम बिन, बोझिल सी हो गई, ये ज़िन्दगी तुम बिन, खो गई कहीं दिल की, हर ख़ुशी तुम बिन, गुमसुम सी हो गई, ज़िन्दगी तुम बिन, न चाँद ना सितारे, ना नजारे… Read More

chaupal in village

कविता : ये क्या हो गया

हंसते चीखते गली मोहल्ले, अब वीरान से हो गए है। शहर के सारे चौहराये, अब सुनसान हो गए है। पर घर परिवार के लोग, घरों में कैद हो गए है। और परिवार तक ही, अब सीमित हो गए है। और… Read More