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लघु कथा : चीख

रेशमा, कुदसिया दोनों के लिए आज का दिन भी हमेशा जैसा ख़ुशगवार था। सूरज में सुर्ती थोड़ी कम थी इन दिनों। रेशमा की शादी की तैयारियाँ चल रही थी। इसी सिलसिले में रेशमा अपनी सहेली और बहन ज्यादा जैसी कुदसिया… Read More

कविता : आवाज़

तू कर सके तो ऐसा क़र कि नाम हो तेरा काम हो.. तू धूप बन, तू छाव बन जिसकी जरुरत आन हो ।। तू आग बन कुछ इस तरह कि ठण्ड की कोई शाम हो। तू लौ बने अंधेरों की… Read More

कविता : समझ नहीं आता हम भारत को कैसे स्वच्छ करें!

समझ नहीं आता हम भारत को कैसे स्वच्छ करें? क्या वही थी वो गंगा, अविरल सी बहती, जहाँ वायु में शुद्धता का समावेश था। कितना सुंदर था हमारा भारत कितना स्वच्छ था हमारा भारत पूरे विश्व में शुद्धता का  परिमाण… Read More

लघुकथा : नालायक बेटा

रामानंद बाबू को अस्पताल में भर्ती हुए आज दो महीने हो गये। वे कर्क रोग से ग्रसित हैं। उनकी सेवा-सुश्रुषा करने के लिए उनका सबसे छोटा बेटा बंसी भी उनके साथ अस्पताल में ही रहता है। बंसी की मां को… Read More

कविता : चाह नहीं

दिल की चाह मान सम्मान, पाने की कभी नहीं रही। लिखा मेरा शौक है, और हिंदी मेरी माँ हैं। इसलिए विश्व की ऊंचाईयां, मां को दिलाना चाहता हूँ। और माँभारती की सेवा करना, अपना फर्ज समझता हूँ।। इसलिए में साफ… Read More

कविता : बहन

दिखती है जिसमें  मां की प्रतिच्छवि  वह कोई और नहीं होती है बान्धवि जानती है पढ़ना भ्राता का अंतर्मन अंतर्यामी होती है ममतामयी बहन है जीवन धरा पर जब तक है वेगिनी उत्सवों में उल्लास  भर देती है भगिनी  +120

कविता : संभल कर रहो

जान ले रहा है ‘कोरोना’, अब हिंदुस्तान में। अब संभल कर रहो, अपने-अपने घरों में। कैसी बीमारी ये आई, जान पर आफत आई। न कोई समझे-न ही जाने, बस हाँ में हाँ सबकी मिलानी। कैसे ले रही है, जान इंसानों… Read More

व्यंग्य : घर बैठे-बैठे

“पुल बोये से शौक से  उग आयी दीवार कैसी ये जलवायु है  हे मेरे करतार” दुनिया को जीत लेने की रफ्तार में ,चीन ने ये क्या कर डाला ,जलवायु ने सरहद की बंदिशों को धता बताते हुए सबको घुटनों पर… Read More

कविता : विश्वास

मुसीबत का पहाड़,  कितना भी बड़ा हो। पर मन का विश्वास, उसे भेद देता है। मुसीबतों के पहाड़ों को, ढह देता है। और अपने कर्म पर, जो भरोसा रखता है।। सांसारिक उलझनों में,      उलझा रहने वाला इंसान। यदि… Read More

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कविता : कवि सम्मेलन

स्वार्थपरायण होते आयोजक संग प्रचारप्रिय प्रायोजक भव्य मंच हो या कोई कक्ष उपस्थित होते सभी चक्ष सम्मुख रखकर अणुभाष करते केवल द्विअर्थी संभाष करता आरंभ उत्साही उद्घोषक समापन हेतु होता परितोषक करते केवल शब्दों का शोर चाहे वृद्ध हो या… Read More