दीपक में अगर नूर न होता तन्हा दिल ये मजबूर न होता मैं आपको ईद मुबारक कहने जरूर आता अगर आपका घर इतना दूर न होता सदा हंसते रहो जैसे हसते है फूल दुनिया के सारे गम तुम जाओ… Read More
मुझे कम ना आंको लोगों मैं शिक्षक राष्ट्र निर्माता हूँ कोरोना की इस जंग में मेरी भूमिका मै बताता हूँ । पूरा समाज मेरा ऋणी है इस बात को कौन इन्कार करे मैंने तो बस इतना कमाया है मेरे शिष्यों… Read More
“एक सामान्य स्त्री जो मर्यादा, सीमाओं, इज्जत और कर्तव्यों के ऐसे चक्रव्यूह में होती है जिसे पार करना असंभव सा प्रतीत होता है, फिर भी उसकी आकांक्षाएं उसे उस चक्रव्यूह के पार सोचने के लिए मजबूर करती है और यह… Read More
“और इस तरह आज फिर से एक मजदूर ने बिना अपने घर की दहलीज छूए रास्ते में ही दम तोड़ दिया । इन मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन? ये कोरोना वायरस, ये गरीबी, या फिर हमारी ये असंवेदनशील सरकार… Read More
बुधुआ ने सुना कि रेपो रेट में हो गई है कटौती अब कम हो जाएगी ईएमआई गांव के मास्टर साहब से पूछेगा वह उसका मायने उसे ग्रोथ रेट भी जानना है और यह भी जानना है कि एम एस एम… Read More
अलग नहीं हो तुम कभी मुझे से न मैं हूँ कभी अलग तुम से पारस्परिक सहयोग से चलती है जिंदगी अंतिम सांस तक अकेला कोई जी नहीं सकता सह अस्तित्व है प्रबल शक्ति। भेद – विभेद की रचना में अपने… Read More
अब तो संभल जा इन्सान सचेत कर रहा है भगवान देख ले धरती पे ये अजाब गुनाहों से तौबा कर इन्सान डर भी लगता है कोरोना से अपनी फितरत को तो पहचान मन में खोट फिर बुरा सोच क्यूं खुदा… Read More