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happy eid

ईद मुबारक

दीपक में अगर नूर न होता तन्हा दिल ये मजबूर न होता मैं आपको ईद मुबारक कहने जरूर आता अगर आपका घर इतना दूर न होता   सदा हंसते रहो जैसे हसते है फूल दुनिया के सारे गम तुम जाओ… Read More

कविता : मैं शिक्षक योद्धा हूँ

मुझे कम ना आंको लोगों मैं  शिक्षक राष्ट्र निर्माता हूँ कोरोना  की  इस  जंग  में मेरी भूमिका मै  बताता हूँ । पूरा  समाज  मेरा  ऋणी  है  इस बात को कौन इन्कार करे मैंने तो बस इतना कमाया है मेरे शिष्यों… Read More

लेख : मर्यादा

“एक सामान्य स्त्री जो मर्यादा, सीमाओं, इज्जत और कर्तव्यों के ऐसे चक्रव्यूह में होती है जिसे पार करना असंभव सा प्रतीत होता है, फिर भी उसकी आकांक्षाएं उसे उस चक्रव्यूह के पार सोचने के लिए मजबूर करती है और यह… Read More

कहानी : धक्का

“और इस तरह आज फिर से एक मजदूर ने बिना अपने घर की दहलीज छूए रास्ते में ही दम तोड़ दिया । इन मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन? ये कोरोना वायरस, ये गरीबी, या फिर हमारी ये असंवेदनशील सरकार… Read More

कविता : बुधुआ

बुधुआ ने सुना कि  रेपो रेट में हो गई है कटौती अब कम हो जाएगी ईएमआई गांव के मास्टर साहब से पूछेगा वह उसका मायने उसे ग्रोथ रेट भी जानना है और यह भी जानना है कि एम एस एम… Read More

poem zindagi

कविता : जिंदगी

अलग नहीं हो तुम कभी मुझे से न मैं हूँ कभी अलग तुम से पारस्परिक सहयोग से चलती है जिंदगी अंतिम सांस तक अकेला कोई जी नहीं सकता सह अस्तित्व है प्रबल शक्ति। भेद – विभेद की रचना में अपने… Read More

कविता : अब तो संभल

अब  तो  संभल जा  इन्सान  सचेत  कर  रहा   है   भगवान देख  ले  धरती  पे  ये  अजाब गुनाहों  से  तौबा  कर  इन्सान डर  भी  लगता  है  कोरोना से अपनी फितरत को तो पहचान मन में खोट फिर बुरा सोच क्यूं खुदा… Read More