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ग़ज़ल : छन-छन के हुस्न उनका यूँ निकले नक़ाब से

छन-छन के हुस्न उनका यूँ निकले नक़ाब से। जैसे निकल रही हो किरण माहताब से।। पानी में पाँव रखते ही ऐसा धुआँ उठा। दरिया में आग लग गई उनके शबाब से।। जल में ही जल के मछलियाँ तड़पें इधर-उधर। फिर… Read More

gandhi ji

कविता : बापू तेरे सपनों का भारत

बापू तेरे सपनों का भारत , आज बड़ी मुश्किल में हैं । सत्य अंहिंसा तुझको पाने , ढूंढे हर महफ़िल में है । बापू तेरे सपनों का भारत , आज बड़ी मुश्किल में हैं । सच है बोझिल ,सच है… Read More

प्रवेशांक : अक्टूबर – दिसंबर 2022 – संपादकीय

साहित्य और सिनेमा ऐसे माध्यम हैं, जिसमें समाज को बदलने की बहुत अधिक ताकत होती है। कहना गलत न होगा की सिनेमा, साहित्य से अधिक प्रभावशाली और आम जनता तक सरलता से पहुँचने में सक्षम है। साहित्य सिनेमा में रूपांतरित… Read More

childhood school days

संस्मरण : स्कूल के वो दिन

पाँचवीं तक घर से तख्ती लेकर स्कूल गए थे। स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी। इस पापबोध के साथ कि विद्यामाता नाराज न हो जायें, कक्षा के तनाव में पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर… Read More

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लेख : आधुनिक काल के सूरदास प्रज्ञाचक्षु रामभद्राचार्य जी

सनातन धर्म को दुनिया का सबसे पुराना धर्म कहा जाता है। वेदों और पुराणों के मुताबिक सनातन धर्म तब से है जब ये सृष्टि ईश्वर ने बनाई। जिसे बाद में साधु और संन्यासियों ने आगे बढ़ाया। ऐसे ही आठवीं सदी… Read More

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शोध लेख : नारी संघर्ष की गाथा ‘नक्काशीदार केबिनेट’

प्रवासी साहित्यकारों में सुधा ओम ढींगरा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। सुधा ओम ढींगरा का साहित्य दो संस्कृतियों पर आधारित होने के कारण उनके साहित्य की मूल संवेदना प्रवासी न होकर ‘अन्त: सांस्कृतिक’ पर आधारित हैं। भारतीय… Read More

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लेख : जरूरी है वक़्त के साथ बदलाव

तेजी के साथ बदलते मूल्यों, नई पीढ़ी ओर पुरानी परम्परागत व्यवस्था का टकराव लाज़मी है, पर समाज अपने आप नहीं बदलता। बदलाव तभी होगा जब पीड़ाओं से गुजरने के बजाय उन समस्याओं का हल ढूंढे। तेजी के आगे बढ़ने वाला… Read More

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हिंदी सिनेमा और साहित्य में संवेदना का संकट

“अब जब तुम देखोगे चेहरा अपना पहचान जैसा सब कुछ, कुछ नहीं होगा कहीं भी, बदली-बदली है विश्व संरचना इन दिनों” बदलती हुई इस विश्व संरचना के दौर में जहाँ दुनियाँ तेजी से बदल रही है। वहीं उसके भीतर की… Read More

Habib Tanvir

साक्षात्कार : हबीब तनवीर पर विशेष

रंजीत कपूर थियेटर एवं फ़िल्मी दुनिया के प्रसिद्ध लेखक एवं निर्देशक हैं। इन्होंने 1973-76 के बीच राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन का कोर्स किया और उसके बाद NSD Repertory Co. से जुड़े रहे। 70 का यही वो दशक है जब… Read More

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तीन मुक्तक : फतह-ए-जिंदगी

सच्चाई के वास्ते तो हम ख़ुदा से ले लेंगे रार तक कभी भी नहीं रूकेंगें जीवन में मौत से हार तक जब तक रहेगा अपने मन में एक अटल विश्वास तब तक उठेंगी हिलोरें धरा से गगन के पार तक… Read More