कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन तलवंडी, पंजाब (पाकिस्तान) में जन्मा एक बालक, मातु पिता ने नाम दिया था उसको नानक। आगे चलकर ये ही नानक सिख धर्म प्रवर्तक… Read More
कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन तलवंडी, पंजाब (पाकिस्तान) में जन्मा एक बालक, मातु पिता ने नाम दिया था उसको नानक। आगे चलकर ये ही नानक सिख धर्म प्रवर्तक… Read More
छोटे-छोटे शहरों में ही बड़ी प्रेमकथाएँ जन्म लेती हैं। भले इतिहास में इनका कोई जिक्र नहीं होता है लेकिन इनमें सुख-दुख के साथ हमेशा एक नया संघर्ष और जिज्ञासाएँ छुपी होती थीं। इन प्रेमकथाओं में भी एक हीरो और एक… Read More
कहते हैं कि अगर आप ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी तालीम पूरी कर लें तो दुनिया भर की सबसे टॉप पोस्ट्स के दरवाजे आपके लिए खुल जाते हैं। तमाम मुल्कों के सदर ऑक्सफ़ोर्ड के ही पढ़े होते हैं। ऑक्सफ़ोर्ड भी अपनी… Read More
लड़ियाँ दीपों की, जले चारों ओर, आज हुई जगमग, रोशन दिवाली। चहुँओर चेहरों पर जलते दीपों सी जगमग, चहुँओर ओर देखो खुशचेहरों की खुशहाली। मावस रात भी, लगे पूनम चमकती काली है फिर भी, लगे भरपूर उजियाली। पर जिनसे यहाँ… Read More
ऊजे केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मडराय ओह पर सूगा मडराय उजे खपरी जरईबे आदित के सूगा दिहले जुठिआई उजे मरबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरछाई….! इस गीत की महक से शुरू हुआ यह पर्व… Read More
सुनिए ‘आशा ताई’, हां? अरे सुनिए तो, कहिए तो.. “आप सुनती हीं कहाँ हैं? कब से आशा ताई आशा ताई कर रहें हैं।” अरे, कब से सुन ही तो रही हूँ। वैसे आज आप बड़ी तारीफ़ कर रहे हैं। आशा… Read More
ट्रिंग.. ट्रिंग… हैलो जी, आप कौन? मैंनें फोन रिसीव करके पूछा मैं रावण बोल रहा हूँ। उधर से आवाज आई…। रावण का नाम सुनकर मैं थोड़ा घबड़ाया, फिर भी हिम्मत जुटाकर पूछ लिया-जी आपको किससे बात करना है? आपसे महोदय।… Read More
हमारे विश्व गुरु भारत में हर दूसरा मनुष्य ज्ञानी है। उस दूसरे यानी ज्ञानी के सामने समस्या यह रहती है कि उसके हिसाब से पहले वाला कुछ समझना ही नहीं चाहता। इसलिए किसी से भी कुछ कहने के साथ ही… Read More
जब मिले माता के दर्शन जब मिले प्रभुके दर्शन। देखकर गुरु प्रभु को हो जाता भक्त धन्य।।..२ ज़िंदगी की दास्तां, चाहे कितनी हो हंसीं बिन मां के कुछ नहीं, बिन प्रभुके कुछ नहीं।। क्या मज़ा आता गुरुवर, आज भूले से… Read More
दर्द पराया जो अपनाए , भारत भूमि वासी हैं । ‘परहित सबके काम वो आए’ , भारत जन अभिलाषी हैं । मैं और मेरी खुशियां स्वर्णिम , गर्व फूली न समाती है । जन्म लिया भारत में मैंने , जिसकी… Read More